दिल्ली आबकारी नीति मामले में आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और अदालत के बीच तनातनी बढ़ गई है। केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत में पेश होने से इनकार कर दिया है और इसे सत्याग्रह का नाम दिया है। इस पर कानूनी जानकारों और अधिवक्ताओं की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है।
न्यायपालिका को अपनी मर्जी से चलाने का आरोप अधिवक्ता मोनिका अरोड़ा ने इस कदम की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि देश केजरीवाल की मर्जी से नहीं, बल्कि संविधान से चलता है। उन्होंने कहा कि अगर कोई आम नागरिक होता, तो वह अदालत के आदेश का सम्मान करता और उच्च न्यायालय में अपील करता। लेकिन केजरीवाल खास आदमी की तरह व्यवहार कर रहे हैं। वे कोर्ट के बहिष्कार और प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
जज चुनने का अधिकार किसी को नहीं अरोड़ा ने स्पष्ट किया कि भारत की क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम में किसी भी पक्ष को अपनी मर्जी का जज चुनने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि केजरीवाल का यह रुख कि कोर्ट मेरे हिसाब से चलेगा और जज मेरी पसंद का होगा , संवैधानिक मर्यादाओं के खिलाफ है। अदालतें किसी व्यक्ति की इच्छा के अधीन काम नहीं कर सकतीं।
सत्याग्रह पर तंज: गांधी बनाम केजरीवाल केजरीवाल द्वारा खुद को महात्मा गांधी के सत्याग्रह से जोड़ने पर मोनिका अरोड़ा ने करारा प्रहार किया। उन्होंने कहा, गांधी जी ने शराब के खिलाफ सत्याग्रह किया था, दुकानें बंद कराई थीं और विरोध स्वरूप पत्थर भी फिंकवाए थे। वहीं, केजरीवाल ने दिल्ली की हर गली में शराब की दुकानें खुलवाईं और एक के साथ एक फ्री की स्कीम चलाकर लोगों को शराब पिलाई। उन्होंने इसे सत्य का आग्रह नहीं बल्कि शराब पिलाने का आग्रह करार दिया।
क्या है पूरा मामला? गौरतलब है कि बीते 27 फरवरी 2026 को राउज एवेन्यू कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल को आबकारी मामले में बरी कर दिया था। ट्रायल कोर्ट ने सीबीआई की जांच पर भी गंभीर सवाल उठाए थे। हालांकि, सीबीआई ने उस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जिस पर जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच सुनवाई कर रही है। केजरीवाल का कहना है कि उन्हें इस अदालत से निष्पक्ष न्याय की उम्मीद नहीं है।
#WATCH | Delhi | On AAP national convenor Arvind Kejriwal’s letter to Justice Swarana Kanta Sharma and refusing to appear in person or through a lawyer for the hearing in the Delhi excise policy case, Advocate Monika Arora says, “When an order is passed against a person, he files… pic.twitter.com/I4qogyws3h
— ANI (@ANI) April 27, 2026
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