अमेरिका की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल ब्लैंच ने हाल ही में बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि यूएसएस (USSS) एजेंट की जैकेट पर लगी गोली जवाबी कार्रवाई की नहीं, बल्कि सीधे हमलावर की थी। यह बयान सुरक्षा घेरे में मौजूद खामियों की ओर इशारा कर रहा है।
हमलावर कैसे पहुंचा राष्ट्रपति तक? संदिग्ध ने लॉस एंजिल्स से शिकागो और फिर वाशिंगटन डीसी तक का सफर ट्रेन से तय किया और वाशिंगटन हिल्टन होटल में चेक-इन भी किया। हैरानी की बात यह है कि इतनी लंबी यात्रा और होटल में सुरक्षा जांच के बावजूद वह हथियार के साथ सुरक्षित निकल गया। अमेरिकी कानूनों के अनुसार, ट्रेन में हथियार ले जाने पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं है, लेकिन राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए तैनात एजेंसियों की नजरों से उसका बच निकलना एक गंभीर सुरक्षा चूक है।
क्या है अमेरिका की खुफिया ताकत? अमेरिका में 18 खुफिया एजेंसियां काम करती हैं, जिन्हें यूएस इंटेलिजेंस कम्युनिटी (IC) कहा जाता है। इन पर देश हर साल 100 बिलियन डॉलर से अधिक खर्च करता है और इनमें 1 लाख से ज्यादा कर्मचारी तैनात हैं। इन एजेंसियों में CIA (विदेशी जासूसी), NSA (डेटा और सिग्नल), FBI (घरेलू सुरक्षा) और DIA (सैन्य खुफिया) जैसी दिग्गज एजेंसियां शामिल हैं। इतनी विशाल मशीनरी होने के बावजूद राष्ट्रपति की सुरक्षा में हुई यह सेंध कई सवाल खड़ा करती है।
किसके कंधों पर है राष्ट्रपति की सुरक्षा? अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा की जिम्मेदारी यूएस सीक्रेट सर्विस (USSS) की है, जो 2003 से डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी के अधीन है। इनकी प्रेसिडेंशियल प्रोटेक्टिव डिवीजन (PPD) में 3200 से अधिक स्पेशल एजेंट, स्नाइपर और काउंटर-असॉल्ट टीम शामिल होती हैं। इसके अलावा व्हाइट हाउस मिलिट्री ऑफिस, मरीन वन और FBI की एडवांस इंटेलिजेंस टीम भी साथ चलती है।
क्या ये महज लापरवाही है या मिलीभगत? 9/11 के बाद से अमेरिका की आंतरिक सुरक्षा दुनिया में सबसे अभेद्य मानी जाती है। फिर भी डोनाल्ड ट्रंप पर हुआ यह तीसरा हमला इस बात की ओर संकेत करता है कि सिस्टम में कहीं न कहीं अंदरूनी चूक है। इतिहास गवाह है कि अमेरिका में 4 राष्ट्रपतियों ने अपनी जान गंवाई है, जबकि कई अन्य बाल-बाल बचे हैं। ट्रंप पर बार-बार होने वाले हमले यह बताते हैं कि सुरक्षा का ये तामझाम कहीं न कहीं अपनी प्रभावी भूमिका निभाने में नाकाम साबित हो रहा है।
इस घटना ने अमेरिकी खुफिया तंत्र की कार्यप्रणाली पर गहरा अविश्वास पैदा कर दिया है। क्या ये एजेंसियां अपने ही देश के सुरक्षा तंत्र के भीतर छिपे खतरों को पहचानने में अब भी कमजोर हैं? यह आज पूरी दुनिया के लिए चर्चा का विषय है।
Acting AG Blanche: The bullet that hit the USSS agent s vest likely came from the shooter, not crossfire. The suspect traveled by train from L.A. to Chicago to D.C. and checked into the Washington Hilton.
— Open Source Intel (@Osint613) April 26, 2026
CBS News. pic.twitter.com/RPld5qCgX8
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