मिडिल ईस्ट और एशिया में गहरे होते भू-राजनीतिक तनाव के बीच, अब अंतरिक्ष (स्पेस) भी जंग का नया अखाड़ा बनता जा रहा है। पाकिस्तान ने चीन के सहयोग से अपने नए रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट PRSC-EO3 को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है। इस घटनाक्रम ने दक्षिण एशिया में रणनीतिक संतुलन को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।
चीन की धरती से पाकिस्तान की उड़ान चीन की सरकारी एजेंसी के अनुसार, इस सैटेलाइट को उत्तरी चीन के ताइयुआन सैटेलाइट लॉन्च सेंटर से लॉन्ग मार्च-6 रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में भेजा गया। लॉन्च के तुरंत बाद यह अपनी निर्धारित कक्षा में स्थापित हो गया। पाकिस्तान के स्पेस एजेंसी सुपार्को ने इसे बड़ी तकनीकी उपलब्धि बताया है।
ड्यूल यूज तकनीक और सैन्य आशंकाएं आधिकारिक तौर पर EO-3 को कृषि, आपदा प्रबंधन और पर्यावरण निगरानी के लिए बताया गया है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों की राय अलग है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह ड्यूल यूज तकनीक है, जिसका उपयोग आसानी से सैन्य निगरानी के लिए किया जा सकता है। हाई-रिजोल्यूशन इमेजिंग की क्षमता के कारण, यह सैटेलाइट भारतीय सीमावर्ती इलाकों और सैन्य ठिकानों की सटीक तस्वीरें लेने में सक्षम है। आईएसपीआर (पाकिस्तान सेना की मीडिया विंग) द्वारा इस लॉन्च की पुष्टि ने इन आशंकाओं को और अधिक गहरा कर दिया है।
भारत के SBS-3 मिशन की धीमी रफ्तार इस घटनाक्रम के बीच भारत का महत्वाकांक्षी SBS-3 (स्पेस-बेस्ड सर्विलांस-3) प्रोग्राम चर्चा का विषय बन गया है। इस मिशन का उद्देश्य अंतरिक्ष से दुश्मनों की गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखने के लिए एक मजबूत सैटेलाइट नेटवर्क तैयार करना है। हालांकि, पूर्व सैन्य अधिकारियों ने इस प्रोजेक्ट की धीमी गति पर गंभीर सवाल उठाए हैं। बताया जा रहा है कि अभी तक इस मिशन का पहला सैटेलाइट भी लॉन्च नहीं हुआ है, जो भविष्य के युद्धक परिदृश्य में भारत के लिए चिंताजनक हो सकता है।
मिशन सुदर्शन चक्र के लिए क्यों जरूरी है स्पेस ताकत? SBS-3 को भारत के अत्याधुनिक रक्षा प्रोग्राम मिशन सुदर्शन चक्र की आधारशिला माना जा रहा है। इस मिशन का लक्ष्य थल, जल और वायु सेना को एकीकृत कर रियल-टाइम डेटा के जरिए तेजी से फैसले लेना है। आधुनिक स्पेस सर्विलांस के बिना, दुश्मन की हरकतों पर नजर रखना और जवाबी कार्रवाई करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
बढ़ती चुनौती और भारत का भविष्य चीन की तकनीकी मदद से पाकिस्तान अपनी निगरानी क्षमताओं को जिस तरह से बढ़ा रहा है, वह भारत के लिए एक नई रणनीतिक चुनौती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरिक्ष अब केवल अनुसंधान का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का मुख्य स्तंभ है। भारत के लिए अब समय की मांग है कि वह अपने स्पेस प्रोग्राम्स में तेजी लाए, ताकि क्षेत्रीय संतुलन बना रहे और सीमाओं की सुरक्षा के साथ-साथ स्पेस डोमेन में अपनी पकड़ मजबूत की जा सके।
With Pakistan’s launch of EO-3 satellite (ISPR release below) with Chinese assistance from Chinese soil, Pakistan’s indigenous Space-based Remote Sensing has got further strengthened.
— Anshuman Narang (@anshu217) April 25, 2026
India s SBS-3 is still in planning with the first satellite yet to take off. Sorry for being… pic.twitter.com/O8UIK9Do3z
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