महाराष्ट्र की राजनीति में अपने बयानों के लिए अक्सर सुर्खियों में रहने वाले विधायक संजय गायकवाड़ एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं। इस बार निर्दलीय विधायक सत्यजीत तांबे ने उनके आचरण और भाषा पर कड़ा प्रहार करते हुए एक बड़ी बहस छेड़ दी है।
कैसा नहीं होना चाहिए जन प्रतिनिधि सत्यजीत तांबे ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संजय गायकवाड़ ने भले ही गलत तरीके से सही, लेकिन राज्य में एक महत्वपूर्ण बहस शुरू कर दी है कि असली शिवाजी कौन थे? । उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि गायकवाड़ ने यह भी दिखा दिया है कि एक जन प्रतिनिधि को सार्वजनिक जीवन में कैसा नहीं होना चाहिए।
नई पीढ़ी के लिए इतिहास का सही अध्ययन तांबे ने कॉमरेड गोविंद पानसरे की प्रसिद्ध पुस्तक शिवाजी कोण होता? का उल्लेख करते हुए कहा कि आज की नई पीढ़ी तक महाराज का सही इतिहास पहुंचना बेहद जरूरी है। उन्होंने एक निजी अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनकी बेटी ने जब उनसे पूछा कि स्कूल में पढ़ाए जाने वाले और उनके द्वारा बताए जाने वाले शिवाजी महाराज के स्वरूप में इतना अंतर क्यों है, तब उन्हें अहसास हुआ कि इतिहास को संतुलित और समावेशी ढंग से पेश करना कितना अनिवार्य है।
समावेशी स्वराज्य, जो सबका था सत्यजीत तांबे ने जोर देकर कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज का स्वराज्य किसी एक धर्म या जाति का नहीं, बल्कि रैयत (आम जनता) का था। महाराज ने 12 बलुतेदार, 18 पगड जातियों और सभी धर्मों के लोगों को साथ लेकर एक लोकतांत्रिक नींव रखी थी। महाराष्ट्र की वर्तमान प्रगति इसी समावेशी विचारधारा पर टिकी है।
महिलाओं के प्रति सम्मान और नसीहत संजय गायकवाड़ के एक वायरल फोन कॉल का जिक्र करते हुए तांबे ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि महिलाओं के प्रति इस्तेमाल किए गए गायकवाड़ के शब्द पूरी तरह निंदनीय हैं। तांबे ने याद दिलाया कि छत्रपति शिवाजी महाराज का संस्कार था कि पराई स्त्री को माता के समान माना जाए। उन्होंने साफ कहा कि महाराज अपने शत्रुओं की महिलाओं तक का सम्मान करते थे, इसलिए वे गायकवाड़ की इस भाषा को कभी माफ नहीं करते।
विवाद से ऊपर उठकर चिंतन की जरूरत अंत में, सत्यजीत तांबे ने अपील की कि यह पूरी बहस केवल विवाद तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसे आने वाली पीढ़ियों के मार्गदर्शन और महाराज के सच्चे आदर्शों को समझने के एक अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए। तांबे के इस रुख ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में एक नया विमर्श खड़ा कर दिया है।
चुकीच्या पद्धतीने का होईना, संजय गायकवाड यांनी एका अत्यंत महत्त्वपूर्ण विषयाला, हात घालून राज्यात पुन्हा एकदा “शिवाजी कोण होता?” या विषयावर चर्चा सुरू करून दिली. त्याच बरोबर “लोकप्रतिनीधी कसा नसावा” यावरही चर्चा सुरु करुन दिली.
— Satyajeet Tambe (@satyajeettambe) April 26, 2026
खरं तर, या विषयाची चर्चा नव्या पिढीत होणं अत्यंत… pic.twitter.com/1C3GAvx2Xy
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