बिहार की सियासत में बड़ा खेला के संकेत: प्रशांत किशोर और तेज प्रताप की गुपचुप मुलाकात से हलचल
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बिहार का राजनीतिक पारा एक बार फिर चढ़ गया है। राज्य में हालिया सत्ता परिवर्तन के बाद मची उथल-पुथल अभी थमी भी नहीं थी कि अब एक नई मुलाकात ने सियासी गलियारों में खलबली मचा दी है। राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और जनशक्ति जनता दल के सुप्रीमो तेज प्रताप यादव की जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के साथ हुई गोपनीय मुलाकात ने कई कयासों को जन्म दिया है।

आधी रात को हुई मुलाकात का रहस्य राजनीतिक जानकारों के अनुसार, यह मुलाकात सामान्य नहीं थी। देर रात हुई इस सीक्रेट मीटिंग के बाद खुद तेज प्रताप यादव ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया। इसमें दोनों नेता गर्मजोशी से हाथ मिलाते हुए नजर आए। इस मुलाकात को लेकर तेज प्रताप ने कहा कि यह महज औपचारिकता नहीं थी, बल्कि इसमें जनहित और भविष्य की राजनीति के साथ-साथ बदलते समीकरणों पर गहरी चर्चा हुई है।

नई राह की तलाश में तेज प्रताप? राजनीतिक पंडित इस मुलाकात को तेज प्रताप के नए राजनीतिक भविष्य के रूप में देख रहे हैं। गौरतलब है कि लालू प्रसाद यादव से अलग होने और अपनी पार्टी बनाने के बाद तेज प्रताप अपनी अलग पहचान बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। वहीं, प्रशांत किशोर भी बिहार की राजनीति में अपनी पैठ जमाने के लिए नए साथियों की तलाश में हैं। ऐसे में दोनों का साथ आना एक नई रणनीति की शुरुआत हो सकता है।

भाई तेजस्वी के लिए बढ़ सकती हैं मुश्किलें तेज प्रताप यादव का अपने छोटे भाई और राजद नेता तेजस्वी यादव के साथ छत्तीस का आंकड़ा जगजाहिर है। वे कई मौकों पर सार्वजनिक मंचों से तेजस्वी पर निशाना साध चुके हैं। ऐसे में प्रशांत किशोर के साथ उनकी नजदीकियां तेजस्वी यादव के लिए चुनौती साबित हो सकती हैं। हालांकि, हाल के दिनों में पारिवारिक कार्यक्रमों में लालू यादव की मौजूदगी के बावजूद, तेज प्रताप के इस कदम ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अपनी स्वतंत्र राजनीतिक राह पर आगे बढ़ने को तैयार हैं।

क्या बिहार में बनेगा नया गठबंधन? विधानसभा चुनाव के बाद से ही बिहार में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद राज्य की राजनीति एक नए दौर से गुजर रही है। अब प्रशांत किशोर और तेज प्रताप की इस मुलाकात ने उन अटकलों को हवा दे दी है कि बिहार में जल्द ही कोई बड़ा खेला हो सकता है। आने वाले समय में यह मुलाक़ात महज चर्चा बनकर रह जाएगी या किसी बड़े गठबंधन का आधार बनेगी, यह देखना दिलचस्प होगा।

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