सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान की शांतिदूत वाली चाल नाकाम, भारत ने स्पष्ट किया- हम नहीं भूलेंगे
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नई दिल्ली: पहलगाम आतंकवादी हमले की पहली बरसी पर आज भारत उन 26 निर्दोष लोगों को नमन कर रहा है, जिनकी जान पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद ने ली थी। एक ओर दुनिया पाकिस्तान को पश्चिम एशिया संकट में शांतिदूत के रूप में देख रही है, तो दूसरी ओर भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने घावों और दोषियों को कभी नहीं भूलेगा।

शांति का ढोंग और असली मकसद

पाकिस्तान इस समय ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता का नाटक कर रहा है। इसके पीछे उसका एकमात्र स्वार्थ अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी छवि सुधारना और सिंधु जल संधि को लेकर भारत पर दबाव बनाना है। भारत सरकार ने साफ कर दिया है कि आतंकवाद को पनाह देने वाला देश शांति का मसीहा नहीं हो सकता।

विदेश मंत्रालय का कड़ा संदेश

पहलगाम हमले की बरसी पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स पर एक भावुक और सख्त संदेश साझा किया। उन्होंने लिखा, हम नहीं भूलेंगे। भारत पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए निर्दोष लोगों को याद करता है। हम आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई में एकजुट हैं। यह संदेश उन ताकतों के लिए चेतावनी है जो पाकिस्तान को पीड़ित के रूप में पेश करने की कोशिश कर रही हैं।

सिंधु जल संधि का पीड़ित कार्ड

पिछले कुछ समय से चैथम हाउस जैसे कुछ थिंक टैंक और पाकिस्तानी मीडिया एक सुनियोजित एजेंडा चला रहे हैं। वे भारत द्वारा सिंधु जल संधि को निलंबित किए जाने को पाकिस्तान के प्रति अन्याय बता रहे हैं। वे आतंकवाद पर पाकिस्तान की भूमिका को छुपाकर वैश्विक सहानुभूति बटोरने की फिराक में हैं। पाकिस्तान का यह प्रोपेगेंडा तब और तेज हो गया जब उसे ईरान-अमेरिका वार्ता में कथित भूमिका मिली।

पहलगाम: एक जख्म जो अब भी ताजा है

22 अप्रैल, 2025 को कश्मीर की बैसरन घाटी में आतंकवादियों ने मजहब पूछकर 25 भारतीयों और एक नेपाली पर्यटक की निर्मम हत्या कर दी थी। इस कायराना हरकत के अगले ही दिन भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित करने का साहसी निर्णय लिया था।

भारत का करारा जवाब

पहलगाम हमले के बाद भारत ने न केवल कूटनीतिक स्तर पर पाकिस्तान को घेरा, बल्कि सैन्य स्तर पर भी ऑपरेशन सिंदूर के जरिए सीमा पार आतंकियों को सबक सिखाया। भारत ने बिना वायु सीमा का उल्लंघन किए पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकानों को तबाह कर दिया था। आज की बरसी पर भारत ने दोहराया है कि आतंकवाद के खिलाफ यह न तो कोई समझौता है और न ही इस हमले को भूला गया है। पाकिस्तान की शांतिदूत बनने की हर चाल इस कठोर सत्य के सामने बौनी साबित हो रही है।

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