पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान सियासी पारा अपने चरम पर है। प्रचार का शोर थमने से पहले सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच की लड़ाई अब जमीन से हटकर इतिहास और महापुरुषों के सम्मान पर केंद्रित हो गई है। दोनों पार्टियां एक-दूसरे को ऐतिहासिक अज्ञानता के घेरे में लेने की कोशिश कर रही हैं।
ममता बनर्जी का दावा और अमित मालवीय का पलटवार विवाद की शुरुआत तब हुई जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक जनसभा में दावा किया कि जलियांवाला बाग हत्याकांड के विरोध में महात्मा गांधी ने अपनी नाइटहुड की उपाधि लौटा दी थी। इस पर भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करते हुए ममता को घेरा।
मालवीय ने स्पष्ट किया कि जलियांवाला बाग की क्रूरता के विरोध में नाइटहुड की उपाधि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने 1919 में लौटाई थी, न कि गांधी जी ने। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि राज्य का नेतृत्व करने का दावा करने वालों को कम से कम महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्यों की जानकारी तो होनी ही चाहिए।
महुआ मोइत्रा ने योगी आदित्यनाथ को लिया आड़े हाथ वहीं, टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधा। योगी द्वारा दिए गए एक बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए मोइत्रा ने कहा कि उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रसिद्ध नारे तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा का श्रेय स्वामी विवेकानंद को दे दिया।
महुआ ने सोशल मीडिया पर योगी आदित्यनाथ को बुलडोजर बुद्धि संबोधित करते हुए लिखा, कृपया अपने तथ्य ठीक करें। स्वामी विवेकानंद ने यह नहीं कहा था। आप यूपी वापस जाकर अपनी फैंटा पीजिए और बंगाल को बंगालियों पर छोड़ दीजिए।
मतदान और चुनावी भविष्य बंगाल की सियासी पिच पर हो रहे इन बयानों के खेल ने जनता का ध्यान अपनी ओर खींचा है। एक तरफ भाजपा राज्य में सत्ता परिवर्तन का दावा कर रही है, तो वहीं ममता बनर्जी चौथी बार सरकार बनाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही हैं।
राज्य में 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में मतदान होना है। प्रचार के अंतिम दौर में दोनों दलों की कोशिश मतदाताओं को लुभाने के साथ-साथ एक-दूसरे की वैचारिक पकड़ को कमजोर करने की है। चुनावी नतीजों का ऐलान 4 मई को होगा, जो तय करेगा कि बंगाल की जनता ने इतिहास के इस पाठ को किस तरह लिया।
Mamata Banerjee claims that Gandhi ji returned his knighthood in protest of the Jallianwala Bagh massacre.
— Amit Malviya (@amitmalviya) April 21, 2026
Basic history says otherwise.
It was Shri Rabindranath Tagore who renounced his knighthood in 1919 as a mark of protest against the brutality at Jallianwala Bagh.
Facts… pic.twitter.com/zyfgWpv5zh
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