चेन्नई में केजरीवाल-स्टालिन की सियासी जुगलबंदी : क्या 2029 के लिए तैयार हो रहा नया मोर्चा?
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चेन्नई: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के अंतिम दौर में चेन्नई की सड़कों पर एक नई सियासी तस्वीर देखने को मिली। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के साथ मंच साझा किया और भव्य रोड-शो किया। इस मुलाकात को केवल राज्य चुनाव तक सीमित नहीं, बल्कि 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए एक नए विकल्प के उदय के रूप में देखा जा रहा है।

सच्चाई की जीत और भाजपा पर हमला रोड-शो के दौरान एम.के. स्टालिन ने केजरीवाल का स्वागत भाई कहकर किया। उन्होंने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, केंद्र ने केजरीवाल के खिलाफ फर्जी मामले दर्ज कर उन्हें जेल भेजा। लेकिन सत्य को परेशान किया जा सकता है, पराजित नहीं। केजरीवाल ने अदालती लड़ाई जीत ली है। स्टालिन ने केंद्र सरकार पर एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए जनता से भाजपा को सबक सिखाने की अपील की।

गवर्नेंस 2.0 : शिक्षा और स्वास्थ्य का साझा विजन केजरीवाल और स्टालिन ने अपने शासन मॉडल को गवर्नेंस 2.0 का नाम दिया है। केजरीवाल ने कहा कि वे और स्टालिन शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण के मामले में एक ही विजन रखते हैं। जिस तरह दिल्ली में शिक्षा क्रांति आई है, उसी तरह स्टालिन तमिलनाडु में द्रविड़ियन मॉडल को अगले स्तर पर ले जा रहे हैं। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे के मॉडल से सीखने की प्रतिबद्धता जताई है।

2029 का मेगा प्लान और इंडिया गठबंधन राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह मुलाकात 2029 के आम चुनाव की नींव है। विश्लेषकों का मानना है कि केजरीवाल और स्टालिन क्षेत्रीय अस्मिता और जन-कल्याण पर आधारित एक ऐसा राष्ट्रीय विकल्प तैयार करना चाहते हैं, जो दिल्ली और दक्षिण भारत के बीच एक सेतु की तरह काम करेगा। यह इंडिया गठबंधन के भीतर एक मजबूत उप-धुरी के उभरने के संकेत हैं।

तमिलनाडु चुनाव पर प्रभाव 23 अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले केजरीवाल की उपस्थिति ने DMK के पक्ष में शहरी और शिक्षित मतदाताओं के बीच सकारात्मक माहौल बनाया है। AAP ने इस चुनाव में अपने उम्मीदवार न उतारकर सेकुलर प्रोग्रेसिव अलायंस (SPA) को अपना पूर्ण समर्थन दिया है। स्टालिन को उम्मीद है कि केजरीवाल का यह साथ उन्हें सत्ता विरोधी लहर से बचाएगा।

कुल मिलाकर, चेन्नई की यह रैली भविष्य की राजनीति का एक ट्रेलर है। जहाँ भाजपा डबल इंजन के नारे पर जोर दे रही है, वहीं स्टालिन और केजरीवाल सुशासन और दोस्ती के जरिए 2026 में चेन्नई और 2029 में दिल्ली फतह करने का ताना-बाना बुन रहे हैं। अब सबकी नजरें 4 मई को आने वाले नतीजों पर टिकी हैं।

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