भारत-रूस रक्षा समझौते से पाकिस्तान में खलबली: पुतिन को मिली चेतावनी , एक्सपर्ट्स बोले- गलती कर रहे हैं मॉस्को
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भारत और रूस के बीच हाल ही में लागू हुआ ऐतिहासिक रक्षा समझौता (RELOS) दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों में एक नया अध्याय है। इस समझौते के तहत अब दोनों देश एक-दूसरे के क्षेत्र में अपने सैनिक, युद्धपोत और सैन्य विमान तैनात कर सकेंगे। लेकिन इस समझौते ने पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

पाकिस्तानी एक्सपर्ट का फूटा गुस्सा भारत और रूस की बढ़ती दोस्ती पर पाकिस्तानी एक्सपर्ट डॉ. अतिया अली काजमी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर रूस को चेतावनी देते हुए कहा है कि मॉस्को भारत पर दांव लगाकर बड़ी गलती कर रहा है। काजमी का मानना है कि रूस उसी राह पर चल रहा है, जिस पर पहले अमेरिका चला था और अब पछता रहा है।

चीन को बताया भविष्य की असली ताकत पाकिस्तानी एक्सपर्ट का दावा है कि एशिया में भविष्य की असली महाशक्ति चीन है, भारत नहीं। उन्होंने तर्क दिया कि अमेरिका ने चीन को रोकने के लिए भारत को आगे बढ़ाने की कोशिश की, लेकिन आज अमेरिका खुद अपनी रणनीति पर पुनर्विचार कर रहा है। उन्होंने रूस को आगाह किया कि भारत किसी एक देश के साथ पूरी तरह नहीं बंधा है, वह अपने फायदे के लिए पश्चिम और रूस दोनों के साथ संतुलन बना रहा है।

क्या है RELOS समझौता? इस समझौते के अनुसार, अगले पांच वर्षों के लिए भारत और रूस एक-दूसरे के सैन्य अड्डों का उपयोग कर सकेंगे। इसमें एक साथ 3,000 तक सैनिक, पांच युद्धपोत और 10 सैन्य विमानों की तैनाती का प्रावधान है। यह समझौता शांति और युद्ध दोनों स्थितियों में मान्य होगा, जिससे दोनों देशों की नौसेनाओं को ईंधन, मरम्मत और रसद आपूर्ति में भारी मदद मिलेगी।

रणनीतिक बदलाव या महज एक सौदा? अतिया काजमी इसे भारत की रणनीतिक हेजिंग (Strategic Hedging) मानती हैं। उनका कहना है कि भारत रूस से केवल सैन्य पुर्जे और तकनीक पाने के लिए यह समझौता कर रहा है। भारत का लक्ष्य अपने विकल्पों को खुला रखना है, ताकि वह पश्चिमी देशों से भी संबंध न तोड़े और रूसी रक्षा प्रणालियों का रखरखाव भी करता रहे।

भारत को मिला रूसी बंदरगाहों का एक्सेस इस समझौते के लागू होने से भारत को रूस के मुरमांस्क और सेवेरोमोर्स्क जैसे प्रमुख बंदरगाहों तक सीधी पहुँच मिल गई है। वहीं, रूस को हिंद महासागर क्षेत्र में भारतीय नौसेना से लॉजिस्टिक सहयोग की उम्मीद है। 2018 से शुरू हुई यह बातचीत आखिरकार 18 फरवरी, 2025 को हस्ताक्षर के बाद 12 जनवरी, 2026 को पूरी तरह प्रभावी हो गई है।

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