कोलकाता: ईरान-इजरायल युद्ध और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के बंद होने का असर अब बंगाल के चुनावी रण में दिखने लगा है। एलपीजी की भारी किल्लत और बढ़ती कीमतों के कारण सूरत, मुंबई और दक्षिण भारत के राज्यों में काम करने वाले लाखों प्रवासी मजदूर घर वापसी को मजबूर हैं। यह मुद्दा 2026 के बंगाल विधानसभा चुनाव का सबसे बड़ा गेम चेंजर बनता दिख रहा है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे उधना रेलवे स्टेशन के वीडियो ने सबको झकझोर दिया है। बैग-बिस्तर लादे सैकड़ों मजदूर प्लेटफॉर्म पर खड़े हैं। एक मजदूर का दर्दभरा बयान— अब नहीं आऊंगा दोस्त —हजारों प्रवासियों की व्यथा है। एलपीजी की कमी से प्रभावित जीवन-यापन के कारण ये मजदूर अब और बाहर रुकने को तैयार नहीं हैं।
अनुमान है कि गुजरात, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों से करीब 10 से 15 लाख बंगाली मजदूर अपने गृह जिलों की ओर लौट चुके हैं। इनमें मालदा, मुर्शिदाबाद, बर्धमान और उत्तर बंगाल के ग्रामीण इलाकों के श्रमिक बड़ी संख्या में शामिल हैं। ट्रेड यूनियनों और ग्राउंड रिपोर्ट्स के अनुसार, कई निर्माण स्थलों पर वर्कफोर्स आधे से भी कम रह गया है।
सत्ताधारी टीएमसी इसे केंद्र की विफल विदेश नीति बताकर चुनाव में भुना रही है। ममता बनर्जी रैलियों में उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों की बदहाली का मुद्दा उठाकर केंद्र को घेर रही हैं। वहीं, बीजेपी इसे राज्य सरकार की बेरोजगारी वाली नीति पर निशाना बनाने का अवसर मान रही है। उत्तर बंगाल में लौटते मजदूरों के जय श्री राम के नारे इस बात का संकेत हैं कि मुकाबला कड़ा है।
23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होने वाला मतदान इन प्रवासी मजदूरों के आने से पूरी तरह प्रभावित होगा। मालदा, मुर्शिदाबाद, उत्तर-दक्षिण 24 परगना और दिनाजपुर जैसे जिलों में ये मजदूर किंगमेकर साबित हो सकते हैं। जो मजदूर बरसों से बाहर थे, वे अब अपने स्थानीय इलाकों में वोट डालने के लिए तैयार हैं।
राजनीतिक पंडितों के अनुसार, यह घर वापसी केवल पलायन नहीं, बल्कि एक आक्रोश है। गैस सिलेंडर की एक चिंगारी ने बंगाल की सियासत में आग लगा दी है। 4 मई को होने वाली मतगणना ही बताएगी कि क्या यह घर वापसी टीएमसी की सत्ता को मजबूती देगी या बीजेपी के पक्ष में नई इबारत लिखेगी। फिलहाल, प्रवासी मजदूरों की यह भीड़ बंगाल की चुनावी हवा का रुख तय करने के लिए तैयार है।
*Surat’s Udhna Station tells a bigger story.Crowds of workers. Long journeys.
— @Moini (@moini_565) April 21, 2026
Daily struggles.
Special trains deployed—but the question remains: why are so many forced to leave? #GodMorningTuesday #SecretOfHappiness #PBKSvsLSG https://t.co/WeWIKpsKMF pic.twitter.com/ShiDMVyTnv
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