महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के किसानों और जमीन मालिकों के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। अब परिवार के सदस्यों या सह-धारकों के बीच कृषि भूमि के बंटवारे (Partition Deed) पर कोई पंजीकरण शुल्क (Registration Fee) नहीं लिया जाएगा। यह फैसला महाराष्ट्र भू-राजस्व संहिता, 1966 की धारा 85 के तहत लिया गया है।
क्या है नया नियम? सरकार के इस निर्देश के अनुसार, अब पैतृक भूमि या सह-धारकों के बीच जमीन का बंटवारा करना पूरी तरह से मुफ्त होगा। इसका लाभ उन लोगों को भी मिलेगा जिन्हें विरासत में जमीन का अधिकार मिला है। महत्वपूर्ण बात यह है कि अब उन मामलों में भी कोई शुल्क नहीं लगेगा, जहां धारा 85 की पारंपरिक प्रक्रिया का पूरी तरह पालन नहीं किया गया था और लोग सीधे पंजीकरण के लिए दस्तावेज पेश कर रहे हैं।
किसानों को होगा सीधा आर्थिक लाभ अब तक जमीन बंटवारे के समय लगने वाले भारी रजिस्ट्रेशन शुल्क के कारण कई किसान कानूनी प्रक्रिया से कतराते थे। इस शुल्क की माफी से किसानों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ कम होगा और कानूनी प्रक्रिया अब काफी सस्ती हो जाएगी। इससे छोटे और मध्यम किसानों को सबसे अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
विवादों में आएगी कमी सरकार का मानना है कि इस निर्णय से जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी। शुल्क न होने के कारण अधिक से अधिक लोग कानूनी रूप से जमीन का बंटवारा करवाएंगे। इससे परिवार में होने वाले आपसी विवाद कम होंगे और जमीन से जुड़े लंबित मामलों का तेजी से निपटारा हो सकेगा।
क्या कहा राजस्व मंत्री ने? राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने इस फैसले की जानकारी साझा करते हुए कहा कि राज्य सरकार किसानों के जीवन को सरल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य बंटवारे की प्रक्रिया को सुलभ, पारदर्शी और तीव्र बनाना है, ताकि नागरिकों को अनावश्यक परेशानी और आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके।
बदलाव का असर इस निर्णय के बाद उम्मीद है कि ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन के रिकॉर्ड अपडेट करने की गति बढ़ेगी। पंजीकरण शुल्क हट जाने से लोग अब अपनी हिस्सेदारी को आधिकारिक दस्तावेजों में दर्ज करवाने के लिए आगे आएंगे, जिससे लंबे समय में भूमि प्रबंधन में एक सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।
महाराष्ट्रातील शेतकऱ्यांना मोठा दिलासा!
— Chandrashekhar Bawankule (@cbawankule) April 20, 2026
महाराष्ट्र जमीन महसूल संहिता १९६६ च्या कलम ८५ अंतर्गत सहधारकांमध्ये किंवा कुटुंबातील सदस्यांमध्ये होणाऱ्या शेतजमिनीच्या वाटणीपत्रावर आता कोणतेही नोंदणी शुल्क आकारले जाणार नाही.
यासोबतच, वडिलोपार्जित शेतजमिनीबाबत वारसाहक्काने हक्क प्राप्त… pic.twitter.com/2zbWvNROhD
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