आतंकी का कोडनेम खरगोश झाड़ियों में छिपना और बिजली की रफ्तार से भागना खरगोश का स्वभाव है, शायद इसीलिए लश्कर-ए-तैयबा के इस दहशतगर्द का नाम खरगोश रखा गया। इसका असली नाम हैरिस है, जो मूल रूप से पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा का रहने वाला है। पाकिस्तान की जेल में बंद रहने के दौरान आईएसआई (ISI) ने इसे लश्कर में भर्ती कराया और भारत में तबाही मचाने के लिए प्रशिक्षित किया।
14 साल तक भारत की आंखों में झोंकी धूल हैरिस उर्फ खरगोश साल 2012 में भारत में दाखिल हुआ था। पिछले 14 सालों से वह जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे राज्यों में सक्रिय रहा। उसने बड़ी चालाकी से राजस्थान में सज्जाद नाम से अपनी पहचान बनाई। फर्जी मैरिज सर्टिफिकेट के जरिए उसने भारतीय पासपोर्ट हासिल किया और बेखौफ होकर देश में घूमता रहा। अब उसके सऊदी अरब में होने की पुष्टि हुई है।
इमिग्रेशन और सुरक्षा पर उठे बड़े सवाल जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी शेष पाल वैद ने इस घटना को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया है। उन्होंने सवाल किया कि जिस आतंकी की पहचान फर्जी थी, वह देश के बेहद सख्त इमिग्रेशन और सुरक्षा घेरे से बाहर कैसे निकल गया? क्या हमारी एजेसियों की नाक के नीचे से एक पाकिस्तानी आतंकी का निकल जाना बड़ी खुफिया विफलता नहीं है?
क्या सिस्टम में बैठे गद्दारों ने की मदद? सबसे बड़ा सवाल पुलिस वेरिफिकेशन को लेकर है। पूर्व डीजीपी वैद का आरोप है कि बिना अंदरूनी मदद के फर्जी पहचान-पत्र बन पाना लगभग नामुमकिन है। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि यदि इस आतंकी को दस्तावेज बनवाने में किसी भी पुलिसकर्मी या सरकारी अधिकारी ने मदद की है, तो उन्हें तुरंत बर्खास्त किया जाना चाहिए।
पैसे के लिए देश से खिलवाड़ पूर्व डीजीपी ने अफसोस जताते हुए कहा कि आज भारत में पैसों के दम पर कुछ भी संभव है। फर्जी सर्टिफिकेट और पहचान-पत्र आसानी से बनाए जा रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि एनआईए (NIA), सीबीआई (CBI) और आईबी (IB) को इस पूरे मामले की गहन जांच करनी चाहिए। यह केवल एक आतंकी के भागने का मामला नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा के साथ किए गए खिलवाड़ का शर्मनाक उदाहरण है।
*#WATCH | Jammu: On Lashkar-e-Taiba terrorist Umer Harris alias Khargosh surfaced in Saudi Arabia, Former J&K DGP Shesh Paul Vaid says, Harris, alias Khargosh , is a resident of Pakistan... He was facing some cases there. ISIS helped him join Lashkar-e-Taiba and then… pic.twitter.com/2fxCg6ytKI
— ANI (@ANI) April 20, 2026
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