परशुराम जयंती पर मेरठ की डिप्टी एसपी का सख्त अंदाज, फरसा लहराने वालों को दी खुली चेतावनी
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मेरठ में परशुराम जयंती के मौके पर निकाली गई एक शोभायात्रा इन दिनों चर्चा का केंद्र बनी हुई है। इस चर्चा के पीछे कोई धार्मिक विवाद नहीं, बल्कि मौके पर मौजूद डिप्टी एसपी शुचिता सिंह का वह वायरल वीडियो है, जिसमें वे भीड़ को सीधी चेतावनी देती नजर आ रही हैं।

क्या है पूरा मामला? रविवार को परशुराम जयंती के जुलूस के दौरान हाथ में माइक लिए डिप्टी एसपी शुचिता सिंह ने भीड़ को संबोधित करते हुए कहा, ये जो ऊपर बैठे हैं, फरसा लहरा रहे हैं, डंडा लिए हुए हैं, सबकी फोटोग्राफी हो रही है। सब पर मुकदमा लिखा जाएगा।

अधिकारी का यह वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया है। एक तरफ जहाँ कुछ लोग इसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश बताकर उन्हें लेडी सिंघम कह रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ ब्राह्मण समाज में इस बयान को लेकर भारी नाराजगी है।

आस्था पर प्रहार या कानून का पालन? शुचिता सिंह के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। आलोचकों का कहना है कि जुलूस में फरसा (परशुराम जी का अस्त्र) ले जाना आस्था का प्रतीक है, जिसे अपराध की श्रेणी में नहीं रखा जाना चाहिए।

कई यूजर्स ने इस मामले को अन्य जयंती जुलूसों से जोड़ते हुए इसे दोहरा मापदंड करार दिया है। वहीं, समर्थकों का तर्क है कि सार्वजनिक स्थानों पर हथियारों का प्रदर्शन कानून के दायरे में आता है और पुलिस का काम बिना भेदभाव के नियमों का पालन सुनिश्चित करना है।

कौन हैं डिप्टी एसपी शुचिता सिंह? मूल रूप से उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले की रहने वाली शुचिता सिंह एक होनहार अधिकारी मानी जाती हैं। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रतिष्ठित हिंदू कॉलेज से पढ़ाई की है, जहाँ वे गोल्ड मेडलिस्ट रही हैं।

शुचिता का पारिवारिक बैकग्राउंड काफी मजबूत रहा है। उनके पिता अखिलेश सिंह एसडीएम रह चुके हैं और उनके दादा आबकारी इंस्पेक्टर थे। शुचिता ने यूपी पीसीएस परीक्षा पास कर खाकी वर्दी पहनी। अपनी ट्रेनिंग के दौरान उन्हें मुरादाबाद पुलिस अकादमी में सर्वोत्तम कैडेट के अवार्ड से भी नवाजा गया था।

व्यक्तिगत जीवन और चर्चा शुचिता सिंह की शादी साल 2024 में गाजीपुर के पूर्व सांसद राधे मोहन सिंह के बेटे के साथ हुई थी। उनके परिवार के अन्य सदस्य भी राजनीति और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सक्रिय हैं। प्रशासनिक और अकादमिक रिकॉर्ड में बेहतरीन रही शुचिता सिंह का यह कड़क रूप अब उनके प्रोफेशनल करियर के सबसे चर्चित पलों में गिना जा रहा है।

फिलहाल, इस बयान के बाद पुलिस प्रशासन पर दबाव बढ़ता दिख रहा है। अब देखना यह होगा कि क्या इस मामले में आगे कोई कानूनी कार्रवाई की जाती है या फिर इसे केवल एक चेतावनी मानकर शांत कर दिया जाता है।

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