भारत की लोकतांत्रिक यात्रा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम (106वां संविधान संशोधन) एक बड़ा बदलाव लाने वाला कदम माना जा रहा है। इसका मकसद केवल चुनावी राजनीति नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी को सत्ता की मुख्यधारा में बराबरी का हक दिलाना है।
क्या है नारी शक्ति वंदन अधिनियम? इस कानून के तहत लोकसभा, राज्यों की विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित की गई हैं। यह आरक्षण सामान्य के साथ-साथ अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीटों पर भी लागू होगा। सरल भाषा में कहें तो संसद का हर तीसरा सदस्य एक महिला होगी।
रोटेशन प्रणाली देगी नए नेतृत्व को मौका इस अधिनियम की सबसे बड़ी खासियत रोटेशन व्यवस्था है। परिसीमन (Delimitation) के बाद आरक्षित सीटों को हर बार बदला जाएगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि किसी एक निर्वाचन क्षेत्र तक ही आरक्षण सीमित न रहे, बल्कि राज्य के हर हिस्से को महिला नेतृत्व का मौका मिले। फिलहाल यह व्यवस्था 15 सालों के लिए है, जिसे संसद चाहे तो आगे बढ़ा सकती है।
कब से लागू होगा आरक्षण? कानून पारित और राष्ट्रपति द्वारा हस्ताक्षरित होने के बावजूद, इसके लागू होने के लिए दो शर्तें जरूरी हैं: पहली, देश की नई जनगणना और दूसरी, उसके आधार पर होने वाला परिसीमन। सरकार ने संकेत दिए हैं कि परिसीमन के दौरान लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 तक की जा सकती है, ताकि बिना पुरुषों की मौजूदा हिस्सेदारी कम किए महिलाओं को आरक्षण दिया जा सके।
क्यों है यह जरूरी? वर्तमान में लोकसभा में महिलाओं की भागीदारी मात्र 14% के करीब है। नीति निर्माण में महिलाओं की अनुपस्थिति को देखते हुए इसे एक अनिवार्य सुधार माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि विकसित भारत का सपना तभी पूरा होगा जब महिलाएं निर्णय लेने वाली शीर्ष भूमिकाओं में होंगी।
चुनौतियां और भविष्य हालांकि यह कानून मील का पत्थर है, लेकिन विपक्षी दल लगातार ओबीसी (OBC) कोटे के भीतर कोटे की मांग उठा रहे हैं। इसके अलावा, परिसीमन की प्रक्रिया और जनगणना के समय को लेकर भी राजनीतिक बहस जारी है। इन सबके बीच, देश की निगाहें 2029 के चुनाव पर टिकी हैं, जब महिलाएं पहली बार इस अधिनियम के तहत संसद और विधानसभाओं का रुख करेंगी।
देशभर की हमारी माताएं-बहनें और बेटियां, साल 2029 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव से महिला आरक्षण सुनिश्चित करने के निर्णय की सराहना कर रही हैं।
— Narendra Modi (@narendramodi) April 14, 2026
भारत की नारी शक्ति को समर्पित अपने इस पत्र में मैंने दशकों से लंबित इस संकल्प को जल्द साकार करने के विषय में देशवासियों के साथ अपनी भावनाएं… pic.twitter.com/ybUGJj8Vtk
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