ईरान की घेराबंदी: 10 हजार अमेरिकी सैनिकों ने थामी होर्मुज की कमान, 24 घंटे ठप रहा समुद्री व्यापार
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होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका का सख्त पहरा मध्य पूर्व में तनाव चरम पर है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान के खिलाफ घेराबंदी शुरू कर दी है। इस मिशन के तहत 10,000 से अधिक अमेरिकी नाविक, मरीन और एयरफोर्स के जवान तैनात किए गए हैं। साथ ही, एक दर्जन से अधिक जंगी जहाज और दर्जनों लड़ाकू विमान इस क्षेत्र की निगरानी कर रहे हैं।

24 घंटे में एक भी जहाज नहीं गुजर सका घेराबंदी के पहले 24 घंटों में ही अमेरिकी कार्रवाई का असर दिखने लगा है। इस दौरान ईरान जाने वाले या वहां से आने वाले किसी भी जहाज को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं मिली। CENTCOM के अनुसार, 6 मर्चेंट जहाजों को अमेरिकी निर्देशों का पालन करते हुए वापस ओमान की खाड़ी की ओर लौटना पड़ा। यह प्रतिबंध उन सभी जहाजों पर समान रूप से लागू है जिनका संबंध ईरानी बंदरगाहों से है।

अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए सुरक्षा का दावा अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि वह केवल ईरानी हितों को लक्षित कर रहा है। होर्मुज के रास्ते गैर-ईरानी बंदरगाहों की ओर जाने वाले जहाजों को अमेरिकी नौसेना सुरक्षा प्रदान कर रही है। वहीं, यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने भी इस घेराबंदी की पुष्टि की है, जिसका प्रभाव अरब की खाड़ी से लेकर ओमान की खाड़ी तक महसूस किया जा रहा है।

पेरिस में 40 देशों की आपात बैठक समुद्री रास्तों को सुरक्षित करने के लिए कूटनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। फ्रांस और ब्रिटेन ने इस शुक्रवार को पेरिस में 40 देशों की एक संयुक्त बैठक बुलाई है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के अनुसार, इसका उद्देश्य एक मल्टीलैटरल डिफेंस मिशन तैयार करना है ताकि दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग को दोबारा चालू किया जा सके।

पीएम मोदी और ट्रंप के बीच अहम चर्चा इस वैश्विक संकट के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बात की। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति और होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर चर्चा की। गौरतलब है कि दुनिया का करीब 20% कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है, और यहां के तनाव ने वैश्विक महंगाई का खतरा पैदा कर दिया है।

इस्लामाबाद में हो सकती है अगली वार्ता तनाव कम करने के लिए पर्दे के पीछे भी कोशिशें जारी हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की बातचीत इस्लामाबाद में हो सकती है। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर सकते हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि अगले 48 घंटों में पाकिस्तान में कोई बड़ा घटनाक्रम देखने को मिल सकता है, जिससे इस संकट का हल निकलने की उम्मीद है।

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