इस्लामाबाद में आमने-सामने: ईरान-अमेरिका की 4 घंटे चली मैराथन वार्ता, पर होर्मुज पर फंसा पेंच
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इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए हुई चार घंटे की सीधी वार्ता के बावजूद शांति की राह आसान नहीं दिख रही है। पाकिस्तान में आयोजित इस उच्च स्तरीय बैठक में दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल पहली बार आमने-सामने बैठे, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का मुद्दा वार्ता की सबसे बड़ी बाधा बना रहा।

बिना इजाजत कोई नहीं गुजरेगा - ईरान

वार्ता के दौरान ईरान अपनी बात पर पूरी तरह अडिग रहा। ईरानी पक्ष ने साफ कर दिया कि उनकी अनुमति के बिना होर्मुज जलडमरूमध्य से किसी भी जहाज का गुजरना संभव नहीं है। ईरान ने उन अमेरिकी दावों को भी खारिज कर दिया, जिसमें वाशिंगटन ने अपने दो नौसैनिक विध्वंसक पोतों के उस रास्ते से गुजरने की बात कही थी।

ट्रंप का दावा: होर्मुज खोलने की प्रक्रिया तेज

इसके विपरीत, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि दुनिया की भलाई के लिए होर्मुज को खोलने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। उन्होंने कहा कि अमेरिका उन बारूदी सुरंगों को हटाने के लिए सैन्य उपकरण जुटा रहा है, जो ईरान ने जलडमरूमध्य में बिछाई हैं। ट्रंप ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि समझौता विफल रहा, तो ईरान को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

नेतन्याहू का रुख: युद्ध जारी रहेगा

शांति वार्ताओं के बीच इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपना रुख साफ कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ईरान के आतंकी शासन और उसके समर्थकों के खिलाफ इजराइल का सैन्य अभियान नहीं रुकेगा। नेतन्याहू ने संकेत दिए कि सीजफायर का मतलब युद्ध का अंत नहीं है और जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई फिर शुरू की जा सकती है।

वार्ता का भविष्य और आगामी कदम

इस्लामाबाद में घंटों की बातचीत के बाद, विशेषज्ञ टीमों ने निष्कर्ष निकाला है कि अब चर्चा लिखित संदेशों के आदान-प्रदान के जरिए आगे बढ़ेगी। रिपोर्टों के अनुसार, वार्ता का एक और दौर जल्द ही आयोजित किया जा सकता है। फिलहाल, अमेरिकी दल का नेतृत्व जेडी वेंस कर रहे हैं, जबकि ईरानी टीम की कमान संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गलीबाफ के हाथों में है।

वैश्विक चिंता और भारत का हित

इस तनाव के बीच भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा का मुद्दा चिंता का विषय बना हुआ है। हालांकि, होर्मुज के आसपास तनाव के बावजूद भारत आने वाले एलपीजी टैंकरों (जैसे जग विक्रम और ग्रीन आशा ) की आवाजाही जारी है। वार्ता की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि ईरान और अमेरिका अविश्वास के इस माहौल में कितनी जल्दी किसी साझा समाधान पर सहमत होते हैं।

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