ईरान और इजरायल के बीच हालिया संघर्ष में बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा था। इजरायली हवाई हमलों में ईरान के कई रेलवे पुल पूरी तरह तबाह हो गए थे, जिससे दक्षिण ईरान से मशहद तक की कनेक्टिविटी कट गई थी। किसी को उम्मीद नहीं थी कि सामान्य निर्माण में महीनों लेने वाली यह प्रक्रिया इतनी जल्दी पूरी हो सकेगी।
40 घंटों में असंभव को बनाया संभव दुनिया तब हैरान रह गई जब ईरान ने महज 40 घंटों के भीतर चार तबाह हुए रेलवे पुलों को फिर से चालू कर दिया। यह कारनामा न केवल ईरान की इंजीनियरिंग क्षमता को दर्शाता है, बल्कि उनकी युद्ध-पूर्व तैयारियों की भी पोल खोलता है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया कि वे आपातकालीन स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार थे।
तकनीक का जादू: क्या है प्रीकास्ट डेक्ड बल्ब टी-गर्डर्स ? इतनी तेज निर्माण गति के पीछे प्रीकास्ट डेक्ड बल्ब टी-कंक्रीट गर्डर्स तकनीक का हाथ है। सामान्य निर्माण में कंक्रीट को साइट पर ढालने और सूखने में लंबा समय लगता है। इसके विपरीत, ईरान ने पुल के मुख्य ढांचे को पहले ही कारखानों में तैयार कर लिया था।
बल्ब के आकार के ये गर्डर वजन में हल्के लेकिन मजबूती में बेहद सशक्त होते हैं। इन्हें युद्ध स्तर पर साइट पर लाकर केवल असेंबल किया गया, जिससे महीनों का काम घंटों में सिमट गया।
इंजीनियरों और सेना का टीम वर्क पुलों के हिस्सों को असेंबल करना कोई छोटा टास्क नहीं था। इजरायली हमले के बाद मलबे को हटाने से लेकर भारी क्रेन की मदद से गर्डर्स को फिट करने तक का काम सेना, आईआरजीसी (IRGC) और इंजीनियरों की संयुक्त टीम ने किया। जोड़ों को मजबूत स्टील बोल्ट्स से लॉक किया गया ताकि वे रेलवे के भारी लोड को सह सकें।
भारत भी दिखा चुका है ऐसा ही दम यह पहली बार नहीं है जब किसी देश ने ऐसी तत्परता दिखाई है। भारतीय सेना भी ऐसे ही जांबाज कारनामों के लिए जानी जाती है। उत्तराखंड के धराली में आपदा के दौरान जब मुख्य सड़क संपर्क टूट गया था, तब भारतीय सेना ने एक रात में बेली ब्रिज तैयार कर दिया था। उस अस्थाई पुल ने न केवल लोगों की जान बचाई, बल्कि सेना के भारी ट्रक भी उस पर से गुजर सके थे।
ईरान की यह घटना भविष्य के युद्धों में रैपिड इंफ्रास्ट्रक्चर रिकवरी की नई मिसाल बन गई है। यह दिखाता है कि कैसे आधुनिक इंजीनियरिंग और सटीक प्लानिंग के जरिए दुश्मन की तबाही को महज एक अस्थायी बाधा में बदला जा सकता है।
ليس خلال 40 عامًا ولا 40 يومًا، بل خلال 40 ساعة، أُعيد بناء أربعة جسور متضرّرة جرّاء هجمات النظام الإسرائيلي على خطّ السكك الحديدية من جنوب إيران إلى مشهد. pic.twitter.com/hXF3YGGtgO
— Iranian Consulate in Najaf (@IraninNajaf) April 11, 2026
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