आर्टेमिस-2 मिशन की सफलता का जश्न पूरी दुनिया मना रही है, लेकिन सोशल मीडिया का एक धड़ा इसे एक बड़ी साजिश बता रहा है। एक्स (ट्विटर) और टिकटॉक पर #FakeNASA और #FakeSpace जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। आलोचकों का दावा है कि यह मिशन हकीकत नहीं, बल्कि किसी हॉलीवुड फिल्म की तरह स्टूडियो में शूट किया गया है। आइए, इन वायरल दावों की सच्चाई जानते हैं।
सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा वायरल दावा यह है कि अंतरिक्ष यात्रियों के वीडियो ग्रीन स्क्रीन के सामने शूट किए गए हैं। यूजर्स का तर्क है कि वीडियो में पृथ्वी का रंग अस्वाभाविक नीला है और खिड़की से दिख रहे तारे टिमटिमा नहीं रहे हैं।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, अंतरिक्ष में वायुमंडल न होने के कारण तारे टिमटिमाते नहीं, बल्कि स्थिर रोशनी की तरह दिखते हैं। रही बात तस्वीरों की, तो ओरियन कैप्सूल में लगे आधुनिक 4K कैमरों ने पृथ्वी की पहले से कहीं अधिक स्पष्ट और जीवंत तस्वीरें ली हैं।
जैसे ही ओरियन ने चांद के पिछले हिस्से की तस्वीरें भेजीं, एलियन हंटर्स ने वहां एक चौकोर ढांचा दिखने का दावा किया। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह पैरेडोलिया (Pareidolia) का मामला है—जहाँ इंसान धुंधली तस्वीरों में जानी-पहचानी आकृतियां देखने लगता है। चांद के गड्ढों और चट्टानों की छाया अक्सर दूर से किसी कृत्रिम ढांचे जैसी दिखाई दे सकती है।
साजिश रचने वालों का कहना है कि इंसान पृथ्वी की खतरनाक वैन एलन रेडिएशन बेल्ट को पार करके जिंदा नहीं बच सकता। नासा ने स्पष्ट किया है कि ओरियन स्पेसक्राफ्ट को विशेष रेडिएशन शील्डिंग से लैस किया गया था। साथ ही, अंतरिक्ष यान इस बेल्ट से इतनी तेजी से गुजरा कि विकिरण का प्रभाव न्यूनतम रहा।
कुछ यूजर्स का कहना है कि तस्वीरें AI से बनाई गई हैं या वीडियो के कुछ फ्रेम एडिट किए गए हैं। हालांकि, डिजिटल फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स ने इन तस्वीरों को पूरी तरह असली करार दिया है। नासा ने इस बार अत्याधुनिक लेजर कम्युनिकेशन सिस्टम का उपयोग किया है, जिससे डेटा ट्रांसफर और तस्वीर की गुणवत्ता पहले की तुलना में कहीं बेहतर है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धियां अक्सर कॉन्स्पिरेंसी इन्फ्लुएंसर्स के लिए कंटेंट का आसान जरिया बन जाती हैं। अंतरिक्ष की जटिल भौतिकी समझना आम आदमी के लिए मुश्किल होता है, और इसी उलझन का फायदा उठाकर भ्रम फैलाया जाता है। आर्टेमिस-2 मिशन ने चांद पर इंसान की वापसी का मार्ग प्रशस्त कर दिया है, लेकिन ऐतिहासिक कारनामे अक्सर विवादों के साथ ही आते हैं।
🚨🇺🇸🧑🚀 BOMBSHELL THE ARTEMIS ll BACK TO MOON MISSION IS FAKE:
— Gerhardt vd Merwe (@realgerhardtvdm) April 5, 2026
The latest livestream with the Artemis II astronauts clearly shows that it s all a green screen setup. People in the U.S. are freaking out big time! pic.twitter.com/YjqqemkuZn
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