मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा और व्यापारिक हितों को सुरक्षित करने के लिए कूटनीतिक सक्रियता बढ़ा दी है। ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम की खबरों के बीच भारत भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए नई रणनीतिक साझेदारी बुन रहा है।
यूएई में विदेश मंत्री का एनर्जी मिशन विदेश मंत्री एस. जयशंकर इस समय यूएई के दौरे पर हैं। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव भारत के लिए चिंता का विषय है। भारत इस क्षेत्र में अपनी निर्भरता को देखते हुए दीर्घकालिक ऊर्जा विकल्पों पर बातचीत कर रहा है।
पेरिस और बर्लिन में विदेश सचिव की कूटनीति अमेरिका में ट्रंप प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों के साथ सफल वार्ता के बाद, विदेश सचिव विक्रम मिसरी अब तीन दिवसीय फ्रांस और जर्मनी यात्रा पर हैं। अमेरिका के साथ महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों (CET) पर बनी सहमति के बाद, अब वह यूरोप के इन दो बड़े देशों के साथ भी साझेदारी को नई ऊंचाई देने के मिशन पर हैं।
फ्रांस के साथ रक्षा और तकनीक पर फोकस पेरिस में विदेश सचिव फ्रांसीसी विदेश मंत्रालय के महासचिव के साथ भारत-फ्रांस विदेश कार्यालय परामर्श की सह-अध्यक्षता करेंगे। इस दौरान रक्षा, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष, साइबर डोमेन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे आधुनिक क्षेत्रों पर चर्चा होगी। दोनों देशों के बीच लोगों का आदान-प्रदान भी वार्ता का मुख्य एजेंडा है।
जर्मनी के साथ हरित ऊर्जा और व्यापार जर्मनी में विक्रम मिसरी का एजेंडा व्यापार, निवेश, हरित ऊर्जा और रक्षा सुरक्षा पर केंद्रित रहेगा। जर्मनी के साथ चर्चा में इस बात पर जोर दिया जाएगा कि कैसे टेक्नोलॉजी और विकास सहयोग के जरिए वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर आपसी समन्वय बढ़ाया जा सके। यह दौरा भारत की आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को और अधिक विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
भारत के लिए यह दौरा क्यों है क्रिटिकल? कुछ समय पहले ही जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मेर्ज और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भारत का दौरा किया था। ऐसे में विदेश सचिव की यह यात्रा उन उच्च-स्तरीय समझौतों को जमीन पर उतारने की दिशा में एक अहम कड़ी है। भारत एक तरफ मिडिल ईस्ट के संकट से अपनी ऊर्जा जरूरतों को बचाना चाहता है, तो दूसरी तरफ पश्चिमी देशों के साथ टेक्नोलॉजी और निवेश के नए रास्ते खोलना चाहता है। यह एनर्जी और डिप्लोमेसी का एक संतुलित मेल है, जो भारत को भविष्य के संभावित संकटों से सुरक्षित रखने में मदद करेगा।
A pleasure to address the inaugural session of the 9th Indian Ocean Conference alongside Prime Minister @Ramgoolam_Dr of Mauritius and @rammadhav_, President @indfoundation.
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) April 10, 2026
Made the following key points :
➡️ The Indian Ocean is not just a framework but an ecosystem, a resource… pic.twitter.com/fEKnwdXD1P
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