ड्रेस डिप्लोमेसी: ईरान के सामने वॉरियर तो अमेरिका के लिए सूट-बूट में क्यों दिखे पाक आर्मी चीफ?
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पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर इन दिनों अपनी सैन्य शक्ति के बजाय अपने पहनावे को लेकर चर्चा में हैं। इस्लामाबाद में चल रही अमेरिका-ईरान वार्ता के दौरान मुनीर ने अलग-अलग देशों के प्रतिनिधियों से मिलने के लिए अलग-अलग ड्रेस कोड अपनाकर नई बहस छेड़ दी है।

ईरान के लिए कॉम्बैट ड्रेस का संदेश शुक्रवार को जब ईरानी प्रतिनिधिमंडल, जिसका नेतृत्व मोहम्मद बघेर गलिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अरागची कर रहे थे, इस्लामाबाद पहुंचा, तो जनरल मुनीर सेना की पारंपरिक औपचारिक वर्दी में नहीं, बल्कि कॉम्बैट ड्रेस (युद्ध वाली वर्दी) में नजर आए। सैन्य जानकारों के मुताबिक, यह एक सख्त संकेत था। कुछ समय पहले ईरान और पाकिस्तान के बीच हुए मिसाइल हमलों और सीमा तनाव को देखते हुए, मुनीर का यह रूप ईरान के सामने खुद को एक कठोर सैनिक के रूप में पेश करने की कोशिश थी।

अमेरिका के लिए सूट का साया ईरानी टीम के साथ मुलाकात के कुछ घंटों बाद, शनिवार को जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस्लामाबाद पहुंचे, तो जनरल मुनीर का अंदाज पूरी तरह बदला हुआ था। नूर खान एयरबेस पर अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का स्वागत उन्होंने सैन्य वर्दी के बजाय काले सूट में किया। इस बदलाव को एक्सपर्ट्स अटायर डिप्लोमेसी (पोशाक कूटनीति) का नाम दे रहे हैं।

कूटनीति या ताकत का प्रदर्शन? विशेषज्ञों का मानना है कि कपड़ों के जरिए मुनीर दुनिया को दो अलग संदेश देना चाह रहे हैं। ईरान को वे अपनी सैन्य ताकत और सख्ती दिखाना चाहते हैं, जबकि अमेरिका के साथ वे खुद को एक आधुनिक, कूटनीतिक और सौम्य चेहरे के रूप में पेश कर रहे हैं। हालांकि, एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी के लिए आधिकारिक बैठकों में कपड़ों का इस तरह चुनाव करना कई लोगों को असामान्य लग रहा है।

पाकिस्तान में असली सत्ता का संकेत इस पूरे घटनाक्रम ने पाकिस्तान के सत्ता गलियारों में सेना की भूमिका को फिर से केंद्र में ला दिया है। सामान्यतः ऐसे स्वागत समारोह कूटनीतिक प्रोटोकॉल का हिस्सा होते हैं, लेकिन जनरल मुनीर का स्वयं जाकर दोनों देशों के डेलिगेशन का स्वागत करना यह स्पष्ट करता है कि पाकिस्तान की प्रमुख कूटनीतिक गतिविधियों की बागडोर असल में किसके हाथ में है।

तस्वीरों में अमेरिकी नेताओं के साथ जनरल मुनीर की मौजूदगी और उनका आत्मविश्वास यह संदेश देने के लिए काफी है कि पाकिस्तान में असली ताकत का केंद्र कौन है। फिलहाल, इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता चल रही है, जिसमें पाकिस्तानी सेना की सक्रिय भागीदारी किसी से छिपी नहीं है।

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