आधी रात को जनता के बीच साहब : सीधी कलेक्टर विकास मिश्रा की कार्यशैली बनी चर्चा का विषय
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सीधी जिले में इन दिनों प्रशासनिक गलियारों और आम लोगों के बीच कलेक्टर विकास मिश्रा के चर्चे जोरों पर हैं। आमतौर पर रात के सन्नाटे में सूने रहने वाले बाजार और गांव, इन दिनों अधिकारियों के आने की आहट से गुलजार हो रहे हैं। कलेक्टर की सक्रियता ने यह साबित कर दिया है कि यदि नीयत साफ हो, तो प्रशासन जनता के दरवाजे तक खुद चलकर आ सकता है।

देर रात तक शिकायतों का अंबार

बीते दिनों सिहावल विकासखंड के अमिलिया बाजार का दृश्य कुछ ऐसा ही था। रात के 11 बज रहे थे, लेकिन हजारों की भीड़ सड़क पर कलेक्टर विकास मिश्रा के इंतजार में खड़ी थी। लोगों के हाथों में फाइलों और आवेदनों के बंडल थे। यह भीड़ किसी राजनीतिक रैली की नहीं, बल्कि अपनी समस्याओं के समाधान की आस लेकर आए आम नागरिकों की थी। रात 12 बजे तक कलेक्टर एक-एक व्यक्ति की फरियाद सुनते रहे।

अधिकारी भी ऑन द स्पॉट

कलेक्टर विकास मिश्रा केवल शिकायतें सुनकर फाइलें आगे नहीं बढ़ा रहे, बल्कि मौके पर ही विभागीय अधिकारियों को बुलाकर समाधान के निर्देश दे रहे हैं। राजस्व, पुलिस, जमीनी विवाद और सरकारी योजनाओं में लापरवाही जैसे मामलों पर उन्होंने सख्त रुख अपनाया है। उनका स्पष्ट मंत्र है— जनता को बार-बार दफ्तरों के चक्कर न कटवाएं।

जिले का पहला फील्ड निवासी कलेक्टर

सीधी में शायद यह पहला मौका है जब कोई कलेक्टर जिला मुख्यालय के वातानुकूलित कमरों में बैठने के बजाय ग्रामीण अंचलों में रात्रि विश्राम कर रहा है। मझौली और बहरी जैसे क्षेत्रों में रुककर उन्होंने न केवल जमीनी हकीकत को परखा, बल्कि स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी नकेल कसी है। उनका गांव-गांव घूमना यह साफ संकेत देता है कि अब सुस्त प्रशासन के दिन लद गए हैं।

सीधे निर्देश: फाइलें सीधी तक न पहुंचें

विकास मिश्रा ने सभी अधीनस्थ अधिकारियों को सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि जमीन से जुड़े और छोटे मामले जिला मुख्यालय (सीधी) तक नहीं आने चाहिए। यदि काम निचले स्तर पर हो सकता है, तो उसे वहीं निस्तारित किया जाए। उन्होंने दो टूक कहा है कि काम में लापरवाही बरतने वालों पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन और जनता के बीच घटती दूरियां

कलेक्टर की इस अनूठी कार्यशैली से स्थानीय लोगों में उम्मीद की किरण जगी है। लोग कहते हैं कि लंबे समय बाद उन्हें यह महसूस हो रहा है कि उनकी सुनवाई हो रही है। जहां एक ओर प्रशासनिक अमले में उनके दौरों को लेकर हड़कंप है, वहीं दूसरी ओर आम जनता इस बदलाव का खुले दिल से स्वागत कर रही है। विकास मिश्रा का यह जन-चौपाल मॉडल अब जिले के लिए नजीर बनता जा रहा है।

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