बुजुर्ग का अपमान और ओछी बयानबाजी: कांग्रेस ने हिमंत बिस्वा सरमा को दी इलाज की सलाह
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असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा द्वारा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पर की गई अभद्र टिप्पणी ने सियासी गलियारों में बवाल खड़ा कर दिया है। नोएडा में मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस की सोशल मीडिया चेयरपर्सन सुप्रिया श्रीनेत ने सरमा के बयान को भाजपा की दलित विरोधी मानसिकता और अहंकार का प्रमाण बताया है।

पितृतुल्य व्यक्ति के लिए ऐसी भाषा शर्मनाक सुप्रिया श्रीनेत ने कड़े शब्दों में कहा कि एक मुख्यमंत्री का पद संभाल रहे व्यक्ति द्वारा खड़गे जी जैसे वरिष्ठ नेता के लिए सठियाया जैसे शब्दों का प्रयोग अशोभनीय है। उन्होंने खड़गे की बेटी पर की गई टिप्पणी को लेकर भी नाराजगी जताई और कहा कि एक डॉक्टर और सुशिक्षित महिला के लिए इस तरह की ओछी शब्दावली का इस्तेमाल मुख्यमंत्री की गिरी हुई सोच को दर्शाता है।

अहंकार और भ्रष्टाचार का डर श्रीनेत ने हमला जारी रखते हुए कहा कि सरमा का यह व्यवहार उनके भीतर की असुरक्षा को उजागर करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे होने के कारण मुख्यमंत्री अंदर से डरे हुए हैं और इसी डर को छिपाने के लिए वे ऐसी स्तरहीन बयानबाजी का सहारा ले रहे हैं। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, मुख्यमंत्री को मानसिक स्वास्थ्य की समस्या हो सकती है, उन्हें किसी अच्छे डॉक्टर से इलाज कराना चाहिए।

सीधे टकराव की राह पर कांग्रेस यह विवाद केवल एक बयानी जंग तक सीमित नहीं है। कांग्रेस अब इसे दलित अस्मिता और बुजुर्गों के अपमान के मुद्दे के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की तैयारी में है। सुप्रिया श्रीनेत के तीखे तेवर यह साफ करते हैं कि कांग्रेस इस मुद्दे को चुनाव में भाजपा के खिलाफ एक बड़े हथियार की तरह इस्तेमाल करेगी।

पवन खेड़ा ने भी खोला मोर्चा वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने भी असम पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने एक वीडियो जारी कर कहा कि सरकार पुलिस के जरिए उन्हें डराने की कोशिश कर रही है। खेड़ा ने दो टूक कहा, मैं राहुल गांधी का सिपाही हूं, आपकी धमकियों से डरने वाला नहीं हूं।

चुनावी रण में बिगड़ती भाषा की मर्यादा पांच राज्यों में आगामी चुनावों के मद्देनजर नेताओं के बीच शब्दों की मर्यादा लगातार टूट रही है। हिमंत बिस्वा सरमा के बयान और कांग्रेस के पलटवार ने चुनावी माहौल को और अधिक तीखा बना दिया है। फिलहाल, सभी की निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या भाजपा इस मामले पर कोई सफाई पेश करती है या फिर जुबानी जंग का यह सिलसिला और तेज होता है।

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