अमेरिका में 600 रुपये की मेथी: सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस, क्या वाकई भारत सस्ता है?
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सोशल मीडिया पर एक वीडियो इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसमें एक भारतीय महिला अमेरिका में बिकने वाली मेथी की कीमत देखकर हैरान है। वीडियो के अनुसार, जो मेथी भारत में मात्र 10 रुपये की मिल जाती है, उसी के लिए अमेरिका में लगभग 600 रुपये चुकाने पड़ते हैं।

महंगी सब्जी के पीछे का असली गणित विदेशी देशों जैसे अमेरिका, यूके और यूरोप में सब्जियों की कीमतें भारत की तुलना में काफी अधिक हैं। इसका मुख्य कारण वहां का महंगा श्रम है। खेती, कटाई और पैकिंग में लगने वाली मजदूरी वहां भारत के मुकाबले कई गुना ज्यादा है। इसके अलावा, कोल्ड चेन और लंबी दूरी के परिवहन का खर्च भी कीमतों को आसमान पर पहुंचा देता है।

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर इस वीडियो को @WokePandemic नामक हैंडल से शेयर किया गया। वीडियो सामने आते ही यूजर्स ने अपनी अलग-अलग राय रखनी शुरू कर दी। एक यूजर ने तर्क दिया, अमेरिका में पानी की बोतल भी 5 डॉलर की है, लेकिन वहां की कमाई भी अधिक है। हमें डॉलर में कमाई और रुपये में खर्चे की तुलना करना बंद करना चाहिए।

क्या विदेश में बसना महज दिखावा है? वीडियो पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए एक अन्य यूजर ने लिखा, अगर भारत इतना ही बेहतर है, तो लोग वहां जाकर क्यों बसना चाहते हैं और आने वाली पीढ़ियां अमेरिकी नागरिक क्यों बनाना चाहते हैं? वहीं, कुछ लोगों ने इस पर तंज कसा कि जो लोग विदेश जाकर भारत की कमियां निकालते हैं, उन्हें वापस भारत आ जाना चाहिए।

सब्जी से परे: घर और आईफोन की महंगाई बहस के बीच एक यूजर ने मुंबई के उदाहरण से स्थिति को स्पष्ट करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि भारत में जर्जर फ्लैट्स के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने पड़ते हैं, जबकि अमेरिका में उसी कीमत में बेहतर सुविधाएं मिलती हैं। साथ ही, भारत में टैक्स के कारण आईफोन और कारों जैसी चीजें भी अमेरिका की तुलना में महंगी पड़ती हैं।

निष्कर्ष: अधूरा सच है सब्जियों की तुलना विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सब्जियों की कीमतों के आधार पर देश की आर्थिक स्थिति का आकलन करना गलत है। भारत में जहां सब्जियां और लेबर सस्ता है, वहीं अन्य बुनियादी सुविधाएं, स्वच्छ पर्यावरण और लाइफस्टाइल के अन्य खर्चों के मामले में अलग चुनौतियां हैं। यह वीडियो एक बार फिर इस बहस को हवा दे गया है कि सस्ता बनाम महंगा का पैमाना हर किसी के लिए अलग हो सकता है।

डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और वायरल वीडियो के दावों पर आधारित है। हम इन दावों की किसी भी प्रकार से पुष्टि नहीं करते हैं।

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