अमेरिका और ईरान के बीच हुए अचानक संघर्ष विराम (सीजफायर) ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इसे शांति की बड़ी जीत बता रहे हैं, लेकिन सुरक्षा विशेषज्ञों और विश्लेषकों का मानना है कि इस समझौते की शर्तें बेहद असामान्य और संदिग्ध हैं।
पाकिस्तान की भूमिका पर उठे सवाल
इस समझौते में पाकिस्तान की पीसमेकर के रूप में भूमिका ने सबको चौंका दिया है। एफडीडी (FDD) के कार्यकारी निदेशक जोनाथन शांजर ने इस पर गंभीर सवाल उठाए हैं। शांजर का कहना है कि आतंकवाद के प्रायोजक के रूप में पहचाने जाने वाले देश का अचानक मध्यस्थ बन जाना किसी बड़े खेल का संकेत है।
शांजर के अनुसार, पाकिस्तान पर चीन का भारी कर्ज है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि पाकिस्तान अमेरिका का साथ दे रहा है या फिर वह चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के इशारों पर काम कर रहा है। व्हाइट हाउस में पाकिस्तान की इस पहुंच ने अंतरराष्ट्रीय हलकों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
दावों का विरोधाभास: कौन सच बोल रहा है?
इस समझौते की विश्वसनीयता का सबसे बड़ा संकट वाशिंगटन और तेहरान के अलग-अलग बयानों में छुपा है। जहां अमेरिका इसे मात्र दो सप्ताह का अस्थायी युद्धविराम बता रहा है, वहीं ईरान इसे अमेरिका का पूर्ण समर्पण करार दे रहा है।
ईरान ने 10-सूत्रीय शर्तों की एक लंबी लिस्ट जारी की है, जिसमें प्रतिबंधों को हटाना, हर्जाने का भुगतान और पश्चिम एशिया से अमेरिकी सेनाओं की पूरी तरह वापसी जैसी कठोर मांगें शामिल हैं। शांजर के मुताबिक, ईरान के दावे अवास्तविक हैं और जमीनी हकीकत इन दोनों के दावों से बिल्कुल अलग हो सकती है।
क्या फिर भड़क सकता है युद्ध?
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस समझौते की नींव बहुत कमजोर है। दो सप्ताह का यह समय शांति के बजाय एक बारूद के ढेर जैसा है। यदि जमीन पर दोनों सेनाओं के बीच छोटी सी भी गलतफहमी होती है, तो यह संघर्ष और भी अधिक विनाशकारी रूप ले सकता है।
फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका अपनी रणनीति बदल रहा है या फिर यह नए सिरे से हमले की तैयारी के लिए समय जुटाने की एक चाल है। जब तक दावों का यह विरोधाभास खत्म नहीं होता, तब तक इसे एक सफल कूटनीति कहना जल्दबाजी होगी।
#WATCH | Washington, DC | Executive Director at the Foundation for Defence of Democracies (FDD) and former U.S. Treasury counterterrorism analyst, Jonathan Schanzer, says, We know that Vice President JD Vance holds a dim view of foreign intervention, and I think he s been very… pic.twitter.com/LjLpFp8NvY
— ANI (@ANI) April 8, 2026
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