ट्रंप-ईरान सीजफायर: होर्मुज खुला, क्या मध्य-पूर्व में टल गया युद्ध का खतरा?
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मध्य-पूर्व में पिछले कुछ समय से जारी तनाव के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर अपने हमले फिलहाल दो हफ्तों के लिए टाल दिए हैं। जवाब में ईरान ने भी होर्मुज जलडमरूमध्य को निर्बाध आवाजाही के लिए खोलने पर सहमति जताई है।

अचानक यू-टर्न: युद्ध के मुहाने से पीछे क्यों हटे ट्रंप?

कुछ घंटे पहले ही ट्रंप ने ईरान की बुनियादी संरचनाओं—जैसे पावर प्लांट और पुलों—को तबाह करने की धमकी दी थी। लेकिन अचानक आए इस समझौते ने वैश्विक हलकों को चौंका दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला कोई आकस्मिक कदम नहीं, बल्कि पर्दे के पीछे चली लंबी कूटनीति का परिणाम है।

पर्दे के पीछे के खिलाड़ी: पाकिस्तान और चीन की सक्रिय भूमिका

इस समझौते में पाकिस्तान और चीन की भूमिका निर्णायक साबित हुई है। पाकिस्तान ने संघर्ष-विराम का प्रस्ताव रखा, जिसे ट्रंप ने स्वीकार कर लिया। वहीं, चीन ने मध्यस्थता करते हुए ईरान को तनाव कम करने के लिए राजी किया। यह स्पष्ट है कि इस संकट का समाधान अब केवल वाशिंगटन और तेहरान के बीच नहीं, बल्कि ग्लोबल पावर गेम के तहत हो रहा है।

होर्मुज जलडमरूमध्य: वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा

होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल गलियारा है। यदि यह मार्ग बंद होता, तो वैश्विक बाजारों में तेल की कीमतें आसमान छू सकती थीं। ईरान का इसे तुरंत और सुरक्षित तरीके से खोलने का निर्णय दर्शाता है कि यह विवाद केवल सैन्य नहीं, बल्कि आर्थिक संतुलन का भी है।

ईरान की शर्त: क्या स्थायी शांति की नींव पड़ेगी?

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने स्पष्ट किया है कि वे केवल अस्थायी विराम नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक शांति समझौता चाहते हैं। दोनों देशों ने समाधान के लिए अपने-अपने प्रस्ताव पेश किए हैं—ईरान की तरफ से 10-सूत्रीय और अमेरिका की तरफ से 15-सूत्रीय योजना।

सीजफायर या महज शांति का ढोंग ?

सवाल यह है कि क्या यह दो हफ्तों का विराम स्थायी शांति में तब्दील हो पाएगा? डोनाल्ड ट्रंप ने इसे अंतिम समझौते की दिशा में एक कदम बताया है। हालांकि, क्षेत्र में लेबनान और इज़राइल जैसे अन्य देशों की स्थिति भी नाजुक है। यह संघर्ष-विराम मध्य-पूर्व के जलते इतिहास में एक नई उम्मीद है, या फिर अगले बड़े धमाके से पहले की खामोशी, यह तो आने वाले 14 दिन ही तय करेंगे।

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