क्या अमेरिका की ईरान थकान का फायदा उठाएगा चीन? ताइवान पर मंडराया नया खतरा
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ईरान और अमेरिका के बीच 40 दिनों तक चले तनावपूर्ण संघर्ष के बाद दुनिया ने भले ही राहत की सांस ली हो, लेकिन अब नई चिंता ताइवान से निकलकर सामने आई है। ईरान युद्ध के बाद चीन ने अपनी आक्रामक गतिविधियां तेज कर दी हैं।

चीन का ताइवान की सीमा में दुस्साहस ताइवान के रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, 8 अप्रैल तड़के चीनी सेना (PLA) के दो विमानों ने ताइवान की मीडियन लाइन को पार कर लिया। इसके साथ ही पीपल्स लिबरेशन आर्मी नेवी (PLAN) के 9 युद्धपोत और एक सरकारी जहाज को ताइवान के करीब मंडराते देखा गया। ताइवान की सेना अब हाई अलर्ट पर है।

अमेरिका की सीमित क्षमता का डर ताइवान की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या पश्चिम एशिया में 40 दिन तक उलझे रहने के बाद अमेरिका के पास इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन को रोकने के लिए पर्याप्त संसाधन बचे हैं? ईरान के साथ संघर्ष ने दिखा दिया है कि अमेरिका के पास इंटरसेप्टर मिसाइलों और हथियारों का भंडार सीमित है। दक्षिण कोरिया से THAAD मिसाइलों को ईरान के मोर्चे पर शिफ्ट करना, अमेरिका की रक्षात्मक सीमाओं को उजागर करता है।

ट्रंप प्रशासन के लिए नई चुनौती ईरान युद्ध के चलते राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता पर असर पड़ा है और उन्हें घरेलू स्तर पर कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि चीन ताइवान पर हमला करता है, तो क्या अमेरिका अपने सहयोगियों (जापान और दक्षिण कोरिया) को भरोसा दिला पाएगा? नाटो देशों को ईरान हमले की पूर्व सूचना न देने से भी अमेरिका की कूटनीतिक साख पर सवाल उठे हैं।

ग्रे-जोन रणनीति का खतरा विशेषज्ञों का मानना है कि चीन सीधे युद्ध की बजाय ग्रे-जोन रणनीति अपना सकता है। इसमें साइबर हमले, समुद्री नाकेबंदी या ताइवान जलडमरूमध्य में होर्मुज जैसे हालात पैदा करना शामिल है। ताइवान को डर है कि चीन यह देख रहा है कि अमेरिका के घटते सैन्य संसाधन और आंतरिक दबाव उसे लंबे युद्ध से रोक सकते हैं।

ताइवान की तैयारी और चेतावनी ताइवान की लीडरशिप अब ईरान युद्ध को एक भौगोलिक रूप से दूर की घटना नहीं, बल्कि अपने लिए रियल टाइम खतरे की चेतावनी मान रही है। ताइवान के विशेषज्ञों का कहना है कि बीजिंग को यह संदेश देना जरूरी है कि किसी भी प्रकार के दबाव का करारा जवाब दिया जाएगा। ताइवान अब अपनी रक्षा तैयारियों को मजबूती देने के साथ-साथ जनता को एकजुट करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, क्योंकि चीन की चालों को भांपना अब पहले से कहीं ज्यादा जटिल हो गया है।

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