#DNA: ट्रंप की अंतिम चेतावनी और ईरान के खात्मे का काउंटडाउन: क्या 4 घंटे बाद मिट जाएगा एक पूरा शासन?
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ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक सख्त डेडलाइन दी है जिसके खत्म होते ही युद्ध का एक भयावह अध्याय शुरू हो सकता है।

4 बड़ी चोट, ईरान की रीढ़ तोड़ने की तैयारी

ट्रंप की डेडलाइन खत्म होने से पहले ही अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़े हमले शुरू कर दिए हैं। कौम शहर में हुए हमले ने राजनीतिक नेतृत्व को सीधा संदेश दिया है, जबकि खार्ग द्वीप पर 50 से अधिक हमलों ने ईरान की आर्थिक कमर तोड़ दी है।

तेहरान में IRGC के कमांड सेंटर और देश की 10 प्रमुख रेल लाइनों को तबाह करना यह साबित करता है कि अमेरिका ने किल चेन नीति के तहत ईरान की रसद और मिसाइल आवाजाही को पूरी तरह पंगु बना दिया है।

ट्रंप का टाइम बम और सभ्यता मिटाने की धमकी

ट्रंप ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया है कि बुधवार सुबह 5:30 बजे (भारतीय समयानुसार) तक अगर ईरान ने घुटने नहीं टेके, तो एक पूरी सभ्यता (इस्लामिक शासन) का नामोनिशान मिटा दिया जाएगा। ट्रंप का कहना है कि 47 साल पुराने इस शासन के ताबूत में अब आखिरी कील ठोकने का वक्त आ गया है।

अमेरिकी नौसेना का चक्रव्यूह

अरब सागर और भूमध्य सागर में तैनात अमेरिका के तीन बड़े स्ट्राइक ग्रुप—USS अब्राहम लिंकन, USS गेराल्ड आर फोर्ड और USS जॉर्ज बुश—ईरान को चारों ओर से घेरे हुए हैं। 22,000 नौसैनिकों और 225 लड़ाकू विमानों के साथ अमेरिका ने ईरान पर 1,000 मिसाइलें गिराई हैं, लेकिन अभी 2,000 और मिसाइलों का जखीरा तैयार है।

ईरान का पलटवार: सब्र का बांध टूटा

ईरान की इलीट फोर्स IRGC ने चेतावनी दी है कि उनका सब्र खत्म हो चुका है। जवाब में ईरान ने सऊदी अरब, कतर और सीधे इजरायल पर मिसाइलें दागकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। ईरान की खैबर-शेकन मिसाइल, जिसकी मारक क्षमता 1,500 किलोमीटर है, ने इस संघर्ष को और खतरनाक बना दिया है। यह मिसाइल अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम को भी चकमा देने में सक्षम है।

मिडिल ईस्ट में तेल संकट का खतरा

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष और आगे बढ़ा, तो दुनिया 20 प्रतिशत तक तेल और गैस आपूर्ति खो सकती है। ईरान ने पहले ही संकेत दे दिए हैं कि यदि उस पर अंतिम प्रहार हुआ, तो वह तेल आपूर्ति के प्रमुख रास्तों, विशेषकर होर्मुज जलडमरूमध्य को युद्ध का अखाड़ा बना देगा, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था चरमरा सकती है।

नेतन्याहू और ट्रंप का साझा मिशन

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ट्रंप को युद्धविराम न करने की सलाह दी है। उनका तर्क है कि ईरान को थोड़ा भी समय मिला, तो वह अपनी सैन्य क्षमता को दोबारा खड़ा कर लेगा। वर्तमान में इजरायल और अमेरिका पूरी तरह से ईरान के सैन्य ठिकानों को मिटाने के मिशन पर काम कर रहे हैं।

अब पूरी दुनिया की नजरें बुधवार सुबह 5:30 बजे पर टिकी हैं—क्या ईरान आत्मसमर्पण करेगा, या दुनिया एक और बड़े युद्ध की गवाह बनेगी?

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