क्या पेट्रोल-डीजल और गैस की किल्लत होने वाली है? सरकार ने दिया बड़ा अपडेट
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मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच देश में ईंधन की सप्लाई को लेकर फैली अफवाहों पर सरकार ने पूर्णविराम लगा दिया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से स्पष्ट किया गया है कि भारत में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस (LPG) के भंडार पूरी तरह सुरक्षित हैं।

सप्लाई पूरी तरह सामान्य: सरकार

मंत्रालय की ज्वाइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने साफ किया कि देशभर में कहीं भी ड्रायआउट (ईंधन खत्म होने) की कोई स्थिति नहीं है। पेट्रोल पंप से लेकर LPG डिस्ट्रीब्यूटर तक, सभी जगह आपूर्ति सुचारू रूप से चल रही है।

डिजिटल इंडिया का असर यह है कि अब LPG की 96 फीसदी बुकिंग ऑनलाइन हो रही है, जिससे उपभोक्ताओं को काफी राहत मिली है।

छोटे सिलेंडर पर सरकार का फोकस

सरकार कमर्शियल LPG की आपूर्ति को 70 फीसदी तक बढ़ा चुकी है। वहीं, 5 किलो वाले छोटे सिलेंडर (छोटू सिलेंडर) की बिक्री को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसका नतीजा यह है कि छोटे सिलेंडर की दैनिक बिक्री 77 हजार से बढ़कर 1 लाख के पार पहुंच गई है। पिछले कुछ दिनों में 7.8 लाख से अधिक फ्री ट्रेड सिलेंडर बेचे गए हैं।

समुद्र में भारतीय नाविक सुरक्षित

पोर्ट्स और शिपिंग मंत्रालय ने जानकारी दी है कि तनाव के बावजूद समुद्री सीमा पर स्थिति नियंत्रण में है। फिलहाल, पर्शियन गल्फ क्षेत्र में 16 भारतीय जहाज तैनात हैं, जिन पर 433 भारतीय नाविक काम कर रहे हैं। मंत्रालय लगातार इन पर नजर बनाए हुए है और सभी नाविक पूरी तरह सुरक्षित हैं।

महंगाई और GDP पर क्या है एक्सपर्ट की राय?

भले ही अभी ईंधन की सप्लाई सामान्य हो, लेकिन वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें चिंता का विषय बनी हुई हैं। PwC इंडिया के आर्थिक सलाहकार रानेन बनर्जी के अनुसार, यदि कच्चा तेल लंबे समय तक 100 डॉलर प्रति बैरल रहता है, तो इसका सीधा असर घरेलू महंगाई (CPI) पर पड़ेगा।

विशेषज्ञों का अनुमान है कि कच्चे तेल के दाम में हर 10 डॉलर की बढ़त से महंगाई में 0.3 से 0.4 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है। इतना ही नहीं, यह अनिश्चितता बनी रही तो भारत की GDP ग्रोथ में 0.5 से 1 प्रतिशत की गिरावट देखी जा सकती है।

भविष्य की राह: राहत पर नजर

फिलहाल के लिए आम जनता के पास राहत की खबर है कि उन्हें पेट्रोल-डीजल के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। लेकिन, जिस तरह से वैश्विक हालात बदल रहे हैं, उससे अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। आने वाले दिनों में RBI के कदम और कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।

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