तेहरान: ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच शांति वार्ता को लेकर चल रही अटकलों पर ईरान ने चुप्पी तोड़ी है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने स्पष्ट किया है कि उनका देश बातचीत के खिलाफ नहीं है और इस्लामाबाद जाने से उन्होंने कभी इनकार नहीं किया।
अमेरिकी मीडिया पर बरसे अरागची विदेश मंत्री अरागची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक कड़ा बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी मीडिया ईरान की स्थिति को जानबूझकर गलत तरीके से पेश कर रहा है। अरागची ने साफ किया कि ईरान की प्राथमिकता केवल बातचीत नहीं, बल्कि उस अवैध युद्ध का स्थायी और निर्णायक अंत है, जो उस पर थोपा गया है।
क्या था अमेरिकी मीडिया का दावा? हाल ही में वॉल स्ट्रीट जनरल ने एक रिपोर्ट में दावा किया था कि पाकिस्तान की मध्यस्थता में चल रही शांति वार्ता ठप पड़ गई है। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने इस्लामाबाद में होने वाली बैठक से इनकार कर दिया था क्योंकि उसे अमेरिका की शर्तें मंजूर नहीं थीं। इसके बाद कतर और तुर्किये ने बातचीत के लिए दोहा या इस्तांबुल का विकल्प पेश किया था।
पाकिस्तान की सफाई और कूटनीतिक कोशिशें पाकिस्तान ने इन दावों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया है। पाकिस्तान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने स्पष्ट किया कि मीडिया में जो खबरें चल रही हैं, वे विदेश मंत्रालय की ब्रीफिंग को गलत समझने का नतीजा हैं। पाकिस्तान लगातार इस संकट को सुलझाने के लिए एक गंभीर मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है।
शांति के लिए पांच सूत्रीय योजना पर जोर पाकिस्तान और चीन मिलकर इस युद्ध को खत्म करने के लिए पांच बिंदुओं वाली एक शांति योजना पर काम कर रहे हैं। हाल ही में पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार ने सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैजल बिन फरहान से मुलाकात कर इस योजना पर विस्तार से चर्चा की। वहीं, अमेरिका ने भी अपनी तरफ से 15 सूत्रीय प्रस्ताव रखा है।
चीन की भूमिका पर निगाहें ईरान और अमेरिका के बीच चल रही इस रस्साकशी में अब चीन की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है। बीजिंग लगातार इस क्षेत्र में अपनी सक्रियता बढ़ा रहा है। शांति वार्ता का भविष्य अब इस बात पर निर्भर करता है कि क्या ईरान और अमेरिका युद्ध को समाप्त करने की शर्तों पर एकमत हो पाते हैं या नहीं।
Iran s position is being misrepresented by U.S. media.
— Seyed Abbas Araghchi (@araghchi) April 4, 2026
We are deeply grateful to Pakistan for its efforts and have never refused to go to Islamabad. What we care about are the terms of a conclusive and lasting END to the illegal war that is imposed on us.
پاکستان زنده باد pic.twitter.com/AUjBQxOFyA
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