रूहानी और ज़रीफ़ बने दुश्मन : ईरान में पूर्व राष्ट्रपति और विदेश मंत्री पर लगा जासूसी का आरोप
News Image

ईरान की आंतरिक राजनीति में इस समय जबरदस्त भूचाल आया है। वर्तमान युद्ध के बीच देश के दो सबसे कद्दावर नेताओं—पूर्व राष्ट्रपति हसन रूहानी और पूर्व विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़—पर गंभीर आरोप लगे हैं। उन पर देश के साथ गद्दारी और अमेरिका के लिए जासूसी करने का दाग लगाया गया है।

विवाद की जड़: ज़रीफ़ का शांति प्रस्ताव यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब जवाद ज़रीफ़ ने एक प्रस्ताव रखा। उन्होंने सुझाव दिया कि ईरान को युद्ध जारी रखने के बजाय जीत की घोषणा कर एक सम्मानजनक समझौते की ओर बढ़ना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि युद्ध खिंचने से आम नागरिकों और बुनियादी ढांचे का विनाश तय है।

ज़रीफ़ ने परमाणु कार्यक्रम पर सीमित नियंत्रण और होरमुज़ जलडमरूमध्य को खोलने के बदले आर्थिक प्रतिबंध हटाने का सुझाव दिया था। उन्होंने अमेरिका के साथ नॉन-एग्रेसन पैक्ट की भी बात कही, जिसे कट्टरपंथियों ने आत्मसमर्पण करार दिया।

तेहरान की सड़कों पर भड़का जन-आक्रोश ईरान की सड़कों पर इन नेताओं के खिलाफ लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। प्रदर्शनकारियों ने रूहानी और ज़रीफ़ के पोस्टरों को सरेआम जलाया और मौत बर साजशगर (समझौता करने वालों की मौत हो) के नारे लगाए। स्थिति इतनी बिगड़ गई है कि धार्मिक नेताओं और संसद सदस्यों ने इनकी तुरंत गिरफ्तारी की मांग की है।

संसद और कट्टरपंथियों का तीखा हमला ईरानी सांसद हामिद रसाई ने अदालत से स्पष्ट मांग की है कि रूहानी और ज़रीफ़ को राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों के लिए सलाखों के पीछे भेजा जाए। वहीं, धार्मिक गायक सईद हद्दादियान ने ज़रीफ़ को सार्वजनिक रूप से धमकी दी है कि यदि वे अपना बयान वापस नहीं लेते, तो उनके घर में घुसकर हिसाब लिया जाएगा।

रूहानी का समर्थन और राष्ट्रपति की घेराबंदी पूर्व राष्ट्रपति हसन रूहानी ने ज़रीफ़ का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने भी सरकार से युद्ध को सम्मानजनक तरीके से समाप्त करने की अपील की है। मौजूदा राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान भी इस मुद्दे पर घिरे हुए हैं। उनके युद्ध समाप्ति के संकेतों पर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कड़ी आपत्ति जताई है।

बचाव में आए समर्थक आरोपों के बीच रूहानी के पूर्व सलाहकार हेसामुद्दीन आशना ने ज़रीफ़ का बचाव किया है। उन्होंने दावा किया कि ज़रीफ़ के प्रस्ताव को गलत तरीके से पेश किया गया है। उनका कहना है कि यह अमेरिका के आगे घुटने टेकने का संकेत नहीं, बल्कि एक रणनीतिक चेतावनी थी। बहरहाल, ईरान में राष्ट्रवाद और कट्टरपंथ के इस टकराव ने इन नेताओं के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

मध्य प्रदेश में कुदरत का कहर: ग्वालियर-बैतूल में ओलों की चादर, 45 जिलों के लिए हाई अलर्ट

Story 1

महज़ 15 सेकेंड में कुत्ते का खूनी खेल, 4 लोगों को बनाया शिकार

Story 1

ब्राजील में आसमान से मौत बनकर गिरा विमान: रेस्टोरेंट से टकराकर मलबे में बदली प्राइवेट जेट, 4 की मौत

Story 1

बिहार में मौसम का डबल अटैक: 7 और 8 अप्रैल को भारी बारिश और ओलावृष्टि का हाई अलर्ट

Story 1

लंदन में बसने पर ट्रोल हुए विराट कोहली, तीखे सवाल पर बोले- क्या मैं विदेशी खिलाड़ी दिखता हूं?

Story 1

# खौफनाक: करनाल में चेकिंग से बचने के लिए नाबालिग ने पुलिसकर्मी को बोनट पर घसीटा

Story 1

इजरायल-अमेरिका को ईरान की खुली परमाणु धमकी, खाड़ी देशों के खात्मे की चेतावनी

Story 1

आपका बेटा ट्रंप के पास ज्यादा खतरे में है... , लापता अमेरिकी पायलट की मां को ईरान की तीखी नसीहत

Story 1

लापता अमेरिकी पायलट पर ईरान का तंज: ट्रंप से ज्यादा हमारे पास सुरक्षित है आपका बेटा

Story 1

पाकिस्तान में 80% लोग गे ! ट्रांसजेंडर एक्टिविस्ट हिना बलूच के दावे ने मचाई हलचल