तमिलनाडु चुनाव 2026: क्या स्टालिन की सत्ता को मिलेगी चुनौती? सर्वे ने खोल दिए सियासी पत्ते
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तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी पारा अपने चरम पर है। राज्य में दो प्रमुख प्री-पोल सर्वे सामने आए हैं, जिन्होंने आने वाले चुनाव की तस्वीर काफी हद तक साफ कर दी है। इन आंकड़ों के अनुसार, मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के नेतृत्व वाला DMK गठबंधन सत्ता में वापसी की राह पर मजबूती से आगे बढ़ रहा है।

सर्वे के चौंकाने वाले आंकड़े

लोक पोल और पोल ट्रैकर की रिपोर्ट एक ही दिशा में इशारा कर रही हैं। DMK गठबंधन को कुल सीटों का बड़ा हिस्सा मिलता दिख रहा है।

स्टालिन क्यों हैं पहली पसंद?

मुख्यमंत्री के तौर पर एमके स्टालिन मतदाताओं की पहली पसंद बने हुए हैं। उनके बाद अभिनेता विजय दूसरे और एडप्पाडी के. पलनीस्वामी तीसरे स्थान पर हैं। स्टालिन की लोकप्रियता के पीछे उनकी लोक-कल्याणकारी योजनाएं—जैसे कलैगनार मगालीर उरिमाई थोगई , मुफ्त बस यात्रा और ब्रेकफास्ट स्कीम—सबसे बड़ी वजह मानी जा रही हैं, जिसने विशेषकर महिला वोटर्स को प्रभावित किया है।

विपक्ष का बिखराव, DMK को सीधा फायदा

विपक्ष की सबसे बड़ी कमजोरी उसका बंटवारा है। एक तरफ AIADMK के नेतृत्व वाला NDA है, तो दूसरी तरफ विजय की नई नवेली पार्टी TVK। इन दोनों के बीच वोटों के बंटवारे का सीधा और बड़ा फायदा DMK को मिल रहा है।

TVK की एंट्री: युवाओं में क्रेज, पर सीटों में कमी

विजय की पार्टी TVK ने युवाओं और पहली बार वोट करने वालों के बीच अपनी गहरी पैठ बनाई है। पार्टी को करीब 20% तक वोट मिलने का अनुमान है, लेकिन सांगठनिक ढांचे और गठबंधन के अभाव में ये वोट सीटों में तब्दील होते नहीं दिख रहे हैं।

AIADMK के सामने अस्तित्व का संकट

AIADMK इस समय अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रही है। अंदरूनी कलह, नेताओं का पलायन और कमजोर कैडर पार्टी का मनोबल गिरा रहे हैं। सर्वे के अनुसार, डेल्टा और दक्षिणी जिलों में पार्टी की स्थिति काफी नाजुक है। इसके अलावा, भाजपा के साथ गठबंधन के कारण अल्पसंख्यक वोटों का ध्रुवीकरण भी DMK के पक्ष में हुआ है।

निष्कर्ष: सत्ता की राह आसान?

फिलहाल के सियासी समीकरण स्टालिन के लिए काफी अनुकूल नजर आ रहे हैं। हालांकि, चुनाव तक प्रचार और मुद्दों के बदलने से तस्वीर में मामूली बदलाव आ सकता है, लेकिन मौजूदा डेटा के आधार पर DMK गठबंधन को स्पष्ट बढ़त हासिल है। विपक्षी दल यदि अपने बिखराव को नहीं रोक पाए, तो अगले 5 साल भी तमिलनाडु की सत्ता DMK के पास ही रहने के आसार हैं।

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