साउथ फिल्म इंडस्ट्री के अभिनेता प्रकाश राज एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं। अपनी माँ स्वर्णलता के निधन के बाद, उनके अंतिम संस्कार के तौर-तरीकों ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है। नास्तिकता का दावा करने वाले प्रकाश राज का चर्च में प्रार्थना करते हुए दिखना लोगों को अखर गया है।
अंतिम संस्कार से शुरू हुआ विवाद 29 मार्च 2026 को प्रकाश राज की माँ का 86 वर्ष की आयु में निधन हुआ। उन्होंने अपनी माँ का अंतिम संस्कार पूर्णतः ईसाई रीति-रिवाजों से किया। जब उनकी तस्वीरें सार्वजनिक हुईं, तो नेटिजन्स ने सवाल किया कि जो व्यक्ति स्वयं को नास्तिक बताता है, वह चर्च में क्या कर रहा है? लोगों का तर्क है कि यदि वे धर्म में विश्वास नहीं रखते, तो यह दिखावा क्यों?
ट्रोल होने पर सम्मान का पाठ सोशल मीडिया पर तीखी आलोचना झेलने के बाद प्रकाश राज ने सफाई दी। उन्होंने एक्स पर लिखा कि वे भगवान में विश्वास नहीं करते, लेकिन उनकी माँ की आस्था का सम्मान करना उनका कर्तव्य था। उन्होंने सवाल उठाने वालों को नफरत फैलाने वाले राक्षस तक कह दिया। प्रकाश राज ने इसे बुनियादी सम्मान का नाम दिया है, जिसे वे अपनी माँ के लिए अदा कर रहे थे।
सनातन पर तीखे प्रहार का इतिहास विवाद का असली कारण प्रकाश राज का पिछला ट्रैक रिकॉर्ड है। आलोचकों का कहना है कि जो व्यक्ति रामलीला को ब्लू फिल्म जैसे शब्दों से संबोधित कर सकता है और सनातन धर्म की तुलना डेंगू से कर सकता है, उसे सम्मान की बात करते हुए देखना विडंबनापूर्ण है। उनके बयानों को अक्सर हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाला माना जाता है।
चुनिंदा सम्मान का खेल? सवाल यह है कि क्या प्रकाश राज का सम्मान केवल उनके निजी हितों तक सीमित है? जब वे अपनी माँ के लिए अन्य धर्म की परंपराओं को अपना सकते हैं, तो सनातन धर्म के प्रति उनके मन में इतनी घृणा क्यों है? क्या यह बुनियादी सम्मान सनातनियों के लिए लागू नहीं होता?
दोहरा मापदंड कब तक? प्रकाश राज का कश्मीरी पंडितों के नरसंहार पर विवादास्पद बयानों का बचाव करना और कट्टरपंथियों का हौसला बढ़ाना उनके प्रति जनता के गुस्से को बढ़ाता है। लोग पूछ रहे हैं कि जिस तरह उन्होंने अपनी माँ के लिए ईसाई परंपराओं का आदर किया, वही आदर उन्हें करोड़ों हिंदुओं की आस्था के लिए क्यों नहीं सूझता? आखिर नास्तिकता का ढोंग केवल हिंदुओं को नीचा दिखाने के लिए ही क्यों इस्तेमाल किया जाता है?
Prakash Raj, spare us your fake respect lecture.
— ಸನಾತನ (सनातन) (@sanatan_kannada) April 2, 2026
You claim you don’t believe in God? Fine. But you buried your mother according to her Christian faith. Now you lecture us about “basic respect”?
Then who the hell are you to mock Sanatan Dharma for years our temples, our gods,… pic.twitter.com/jgg1uYCsnD
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