जब क्रिकेट के भगवान पर लगा बेईमानी का दाग: सचिन तेंदुलकर पर बैन की वो कहानी जिसने हिला दी थी दुनिया
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क्रिकेट की दुनिया में बॉल टेम्परिंग शब्द हमेशा से विवादित रहा है। हाल ही में पाकिस्तान सुपर लीग में फखर जमान के बैन होने के बाद यह मुद्दा फिर गरमा गया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस सचिन तेंदुलकर को क्रिकेट की ईमानदारी का पर्याय माना जाता है, उन पर भी यह गंभीर आरोप लग चुका है?

क्या था 2001 का वह विवाद? साल 2001 में दक्षिण अफ्रीका के पोर्ट एलिजाबेथ में भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच दूसरा टेस्ट मैच खेला जा रहा था। मैच के तीसरे दिन सचिन तेंदुलकर गेंदबाजी कर रहे थे। उस दौरान कैमरों में सचिन को गेंद की सीम साफ करते हुए देखा गया। बस फिर क्या था, मैच रेफरी माइक डेनिस ने सचिन पर बॉल टेम्परिंग का आरोप मढ़ दिया और उन्हें एक मैच के लिए बैन कर दिया।

फैंस का फूटा गुस्सा जैसे ही यह खबर फैली, पूरी दुनिया के क्रिकेट फैंस स्तब्ध रह गए। सचिन तेंदुलकर पर बेईमानी का आरोप क्रिकेट प्रेमियों को बर्दाश्त नहीं हुआ। भारत में जगह-जगह विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। फैंस सड़कों पर उतर आए और ICC व मैच रेफरी माइक डेनिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। लोगों का मानना था कि सचिन जैसे खिलाड़ी के साथ यह घोर अन्याय है।

अंपायरों को नहीं थी शिकायत हैरानी की बात यह थी कि जिस दौरान सचिन गेंदबाजी कर रहे थे, ऑन-फील्ड अंपायरों को गेंद की स्थिति को लेकर कोई शिकायत नहीं थी। न ही विपक्षी टीम ने कोई अपील की थी। मैच रेफरी ने केवल फुटेज के आधार पर यह कड़ा फैसला लिया, जिससे पूरे क्रिकेट जगत में भूचाल आ गया था।

कैसे हटा बैन? मामले की गंभीरता को देखते हुए BCCI ने सचिन का पूरा समर्थन किया। सचिन के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिलने के कारण अंततः उन पर से बैन हटा लिया गया। इस घटना ने एक बार फिर बहस छेड़ दी थी कि क्या रेफरी को अंपायरों की राय के बिना इतने बड़े फैसले लेने का अधिकार होना चाहिए?

क्या है बॉल टेम्परिंग? क्रिकेट में गेंद को अवैध तरीके से रगड़कर या खुरदरा करके स्विंग कराने की कोशिश को बॉल टेम्परिंग कहा जाता है। ICC इसे खेल भावना के खिलाफ मानती है। नियमों के उल्लंघन पर विपक्षी टीम को पेनल्टी रन देने के साथ-साथ मैच फीस में कटौती और लंबे बैन तक का प्रावधान है। 2018 में स्टीव स्मिथ और डेविड वॉर्नर जैसे बड़े खिलाड़ी भी इस गलती के कारण एक साल के प्रतिबंध का सामना कर चुके हैं।

सचिन तेंदुलकर का यह मामला आज भी क्रिकेट के इतिहास में एक काले अध्याय की तरह याद किया जाता है, जो यह साबित करता है कि खेल के मैदान पर संदेह के घेरे में कोई भी आ सकता है।

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