दतिया में सियासी भूचाल: क्या कानूनी दांव-पेच से अपनी विधायकी बचा पाएंगे राजेंद्र भारती?
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मध्य प्रदेश की राजनीति में दतिया विधानसभा सीट को लेकर हलचल तेज हो गई है। दतिया के कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने एक पुराने ग्रामीण बैंक धोखाधड़ी मामले में तीन साल की सजा सुनाई है। सजा के ऐलान के कुछ ही घंटों बाद विधानसभा सचिवालय ने उनकी अयोग्यता का गजट नोटिफिकेशन जारी कर दतिया सीट को रिक्त घोषित कर दिया।

सजा मिलते ही सदस्यता रद्द, कांग्रेस खफा अदालत से सजा मिलने के तुरंत बाद विधानसभा सचिवालय की इस त्वरित कार्रवाई ने कांग्रेस को सकते में डाल दिया है। कांग्रेस का आरोप है कि जब निचली अदालत ने अपील के लिए 60 दिन का समय दिया था, तो आधी रात में इतनी जल्दबाजी क्यों की गई? पार्टी इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रही है।

कानून क्या कहता है? विधानसभा के पूर्व प्रमुख सचिव अवधेश प्रताप सिंह के अनुसार, जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत दो साल से अधिक की सजा होने पर सदस्यता स्वतः समाप्त हो जाती है। हालांकि, राजेंद्र भारती के लिए उम्मीद की किरण अभी खत्म नहीं हुई है। यदि वे ऊपरी अदालत (High Court) से अपनी सजा पर स्टे (रोक) हासिल कर लेते हैं, तो उनकी सदस्यता बहाल हो सकती है। फिलहाल उनकी विधायकी का भविष्य उच्च न्यायालय के अगले आदेश पर टिका है।

1998 का मामला और आरोप यह मामला 1998 का है, जिसमें राजेंद्र भारती पर अपनी मां के नाम पर बनी संस्था के जरिए बैंक धोखाधड़ी का आरोप है। शिकायतकर्ता का दावा है कि तीन साल की फिक्स्ड डिपॉजिट को नियमों को ताक पर रखकर 15 साल तक बढ़ाया गया और उससे अवैध रूप से ब्याज के पैसे निकाले गए। बचाव पक्ष का कहना है कि यह एक पुराना मामला है जिसे अब राजनीतिक प्रतिशोध के तहत जिंदा किया गया है।

राज्यसभा चुनाव और सियासी गणित कांग्रेस पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने इसे राज्यसभा चुनावों को प्रभावित करने की भाजपा की बड़ी साजिश करार दिया है। पार्टी ने इस मामले के लिए विवेक तन्खा और कपिल सिब्बल जैसे दिग्गज वकीलों की टीम तैनात की है, जबकि दिग्विजय सिंह खुद पूरी कानूनी प्रक्रिया की निगरानी कर रहे हैं। कांग्रेस का मानना है कि भाजपा विपक्षी विधायकों की संख्या कम कर अपना पलड़ा भारी करना चाहती है।

दतिया का भविष्य: उपचुनाव या बहाली? अब सब कुछ अदालती लड़ाई पर निर्भर है। यदि राजेंद्र भारती को ऊपरी अदालत से राहत नहीं मिलती है, तो दतिया में उपचुनाव होना तय है। वहीं, भाजपा ने इसे एक सामान्य कानूनी प्रक्रिया बताते हुए कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया है। दतिया का यह सियासी रण अब प्रदेश की राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है, जहां कानूनी दांव-पेच और चुनावी बिसात दोनों एक साथ बिछी हुई हैं।

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