आज के दौर में हार्ट अटैक सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी नहीं रह गई है। कई बार पूरी तरह फिट और सामान्य रिपोर्ट वाले लोग भी अचानक दिल का दौरा पड़ने का शिकार हो रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इसके पीछे एक बड़ी वजह गलत तरीके से किया जा रहा जोखिम का आकलन है।
डॉक्टर किसी व्यक्ति को भविष्य में दिल की बीमारी का कितना खतरा है, यह जानने के लिए हार्ट रिस्क कैलकुलेटर का इस्तेमाल करते हैं। समस्या यह है कि अधिकांश कैलकुलेटर पश्चिमी देशों के डेटा पर आधारित हैं।
दिल्ली के जी.बी. पंत अस्पताल के कार्डियोलॉजी प्रोफेसर डॉ. मोहित गुप्ता के अनुसार, भारतीयों की जीवनशैली, खान-पान और शारीरिक बनावट विदेशियों से बिल्कुल अलग है। जब इन विदेशी कैलकुलेटरों का उपयोग भारतीयों पर किया जाता है, तो वे अक्सर खतरे को कम करके दिखाते हैं, जिससे मरीज गलतफहमी में रहता है।
डॉ. मोहित गुप्ता और उनकी टीम ने 5000 हार्ट अटैक मरीजों पर अध्ययन किया और 6 अलग-अलग विदेशी रिस्क स्कोर का परीक्षण किया। इसके परिणाम चौंकाने वाले थे।
अध्ययन में पाया गया कि लगभग 80 प्रतिशत मरीज, जिन्हें विदेशी कैलकुलेटर कम या मध्यम खतरे में डाल रहे थे, उन्हें वास्तव में हार्ट अटैक हो चुका था। यानी, ये कैलकुलेटर भारतीयों के लिए असली खतरे को पहचानने में पूरी तरह विफल साबित हुए।
भारत में हार्ट अटैक की स्थिति पश्चिमी देशों की तुलना में अधिक गंभीर है। यहां लोगों को पश्चिमी देशों के मुकाबले लगभग 10 साल पहले हार्ट अटैक आ रहा है।
आंकड़ें डराने वाले हैं:
धूम्रपान और डायबिटीज के बाद तनाव हार्ट अटैक का तीसरा सबसे बड़ा कारण बनकर उभरा है। भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग तनाव को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह धीरे-धीरे दिल को कमजोर करता है। डॉ. गुप्ता का मानना है कि अब भारतीयों के लिए विशिष्ट और सटीक हार्ट रिस्क मॉडल बनाने की सख्त जरूरत है। उनकी टीम 2021 से इस दिशा में डेटा जुटाकर शोध कर रही है।
हार्ट अटैक के बढ़ते मामलों के बीच सतर्कता ही बचाव है। डॉक्टर इन आदतों को अपनाने की सलाह देते हैं:
हार्ट अटैक अब एक ऐसी चुनौती बन गया है जिसे केवल उम्रदराज लोगों की समस्या कहकर टाला नहीं जा सकता। समय रहते जीवनशैली में बदलाव और अपनी सेहत पर बारीकी से ध्यान देना ही आज के दौर की सबसे बड़ी जरूरत है।
#WATCH | Delhi: On study conducted on 5000 heart attack patients, Professor of Cardiology, GB Pant Hospital, Dr Mohit Gupta says, ... In India, a heart attack happens 10 years before the death of a person. It is more severe. Often, if you and I go to a doctor and ask what the… pic.twitter.com/ALSnOVayTN
— ANI (@ANI) April 3, 2026
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