अमेरिका से जंग के बीच ईरान का बड़ा बयान, कहा- भारत निष्ठा और इंसानियत की जमीन
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लखनऊ: अमेरिका और ईरान के बीच जारी भीषण संघर्ष के 34वें दिन ईरान ने भारत की जमकर सराहना की है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने भारत को निष्ठा और मानवता की भूमि करार दिया है।

क्या बोले ईरान के प्रतिनिधि? लखनऊ में आयोजित एक शोक सभा में शामिल हुए डॉ. इलाही ने कहा कि भारतीय लोगों ने जिस तरह से खामेनेई के प्रति सम्मान प्रकट किया है, वह बेहद भावुक करने वाला है। उन्होंने कहा कि अयातुल्ला खामेनेई उन लोगों की आवाज थे जिनकी अपनी कोई आवाज नहीं थी। भारत के लोग किसी दबाव में नहीं, बल्कि अपनी अंतरात्मा की आवाज पर यहां एकत्र हुए हैं, जो यह साबित करता है कि यह देश नैतिकता के मूल्यों पर चलता है।

भारत में दिखा मिडिल ईस्ट जंग का असर गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त सैन्य हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद से भारत में भी शिया समुदाय का गुस्सा सड़कों पर दिखा। दिल्ली, लखनऊ और जम्मू-कश्मीर सहित देश के कई शहरों में अमेरिका और इजरायल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए और खामेनेई के सम्मान में शोक सभाएं आयोजित की गईं।

34 दिनों से जारी है तबाही मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है। पिछले 33 दिनों से जारी इस जंग में ईरान ने भी चुप बैठने के बजाय अमेरिका और इजरायल के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। इस युद्ध ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर दिया है, जिसका असर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और तेल कीमतों पर भी पड़ रहा है।

मोजतबा खामेनेई की देशवासियों से अपील इस बीच, अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई ने देशवासियों से एक राष्ट्रव्यापी अभियान में शामिल होने की अपील की है। उन्होंने कहा कि युद्ध के कारण हुए बुनियादी ढांचे के नुकसान को बहाल करना अब शीर्ष प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने देश के भीतर मौजूद दुश्मनों और जासूसों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई के संकेत दिए हैं।

आंतरिक सुरक्षा पर ईरान का जोर ईरान ने दावा किया है कि उसने हाल ही में पश्चिमी अजरबैजान प्रांत समेत कई इलाकों से विदेशी जासूसों को गिरफ्तार किया है। सर्वोच्च नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि बाहरी दुश्मनों से लड़ने के साथ-साथ देश को अपनी आंतरिक सुरक्षा और पर्यावरण को बचाने पर भी विशेष ध्यान देना होगा। फिलहाल, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए भी स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।

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