आज का दिन खगोल विज्ञान और मानवीय जिज्ञासा के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया है। फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से नासा के शक्तिशाली SLS रॉकेट ने चांद की ओर उड़ान भरी है। आर्टेमिस-2 मिशन के तहत चार अंतरिक्ष यात्री - रीड वाइसमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैनसेन - 54 साल बाद इंसानी कदमों को चांद के करीब ले जा रहे हैं।
भले ही नासा के अंतरिक्ष यात्री ओरियन कैप्सूल में बैठकर चांद के वैज्ञानिक रहस्यों और क्रेटर्स (गड्ढों) को खोजने निकल पड़े हैं, लेकिन भारतीय बच्चों के लिए चांद हमेशा से प्रयोगशाला से कहीं ज्यादा कहानियों का पिटारा रहा है। सवाल यह है कि आखिर मां ने चांद को चाचा या दादा न कहकर मामा ही क्यों कहा? शायद इसलिए क्योंकि रात के सन्नाटे में मां को अपने मायके का सुकून और बचपन की बेफिक्र नींद याद आती थी, जिसे उन्होंने चांद की ठंडक से जोड़ दिया।
आर्टेमिस-2 की इस ऐतिहासिक उड़ान के बीच, आइए उन यादों को ताजा करते हैं, जिन्होंने हमारे बचपन को संवारा है:
1. चंदा मामा दूर के - वो लोरी का जादू चंदा मामा दूर के, पुए पकाएं बूर के... यह कविता सिर्फ शब्दों का समूह नहीं है, बल्कि उस अपनत्व का प्रतीक है जो हमें चांद से जोड़ता है। दुनिया के लिए वह महज एक खगोलीय पिंड (Celestial Body) है, लेकिन हमारे लिए वह परिवार का ही एक सदस्य है जो रात भर जागकर पहरा देता है।
2. रामधारी सिंह दिनकर का चांद का कुर्ता बचपन की किताबों में पढ़ी राष्ट्रकवि दिनकर की यह कविता चांद के घटने-बढ़ने के विज्ञान को एक मासूम जिद के रूप में पेश करती है। चांद की अपनी मां से ऊनी झिंगोले (कुर्ते) की मांग हमें यह सिखाती है कि चांद हमारे लिए सिर्फ एक पत्थर नहीं, बल्कि एक प्यारा सा बच्चा भी है।
3. दादी-नानी की चरखा कातती बुढ़िया आज के हाई-डेफिनिशन कैमरों से पहले, हर बच्चे के पास अपनी कल्पना का ज़ूम लेंस था। पूर्णिमा के चांद पर दिखने वाले धब्बों को देखकर हर घर में एक कहानी सुनाई जाती थी—चांद पर बैठी एक बुढ़िया जो चरखा कात रही है। यह महज कल्पना नहीं, बल्कि एक सुकून भरी परंपरा थी।
4. ईद का चांद और प्रेमचंद का साहित्य साहित्य में चांद उम्मीद और उल्लास का पर्याय रहा है। मुंशी प्रेमचंद की कहानियों में चांद का दिखना पूरे समाज के लिए खुशियों का संदेश लेकर आता था। हामिद जैसे बच्चों के लिए चांद सिर्फ आसमान में नहीं, बल्कि मन में मेलों की उम्मीद बनकर चमकता था।
आज जब नासा का ओरियन कैप्सूल चांद की कक्षा की ओर बढ़ रहा है, तो यह देखना सुखद है कि विज्ञान की तरक्की और हमारी पुरानी कल्पनाएं एक ही बिंदु पर मिल रही हैं। नासा के यात्री वहां ऑक्सीजन और पानी की खोज करेंगे, लेकिन धरती पर खिड़की से चांद निहारने वाला हर व्यक्ति आज भी उसी मामा से अपनी पुरानी जान-पहचान को ताजा कर रहा है। आर्टेमिस-2 की इस उड़ान ने न सिर्फ अंतरिक्ष के रास्ते खोले हैं, बल्कि हमारे बचपन की कहानियों को भी नए पंख दे दिए हैं।
Liftoff.
— NASA (@NASA) April 1, 2026
The Artemis II mission launched from @NASAKennedy at 6:35pm ET (2235 UTC), propelling four astronauts on a journey around the Moon.
Artemis II will pave the way for future Moon landings, as well as the next giant leap — astronauts on Mars. pic.twitter.com/ENQA4RTqAc
चंडीगढ़ में भाजपा दफ्तर के बाहर धमाका, पूरे शहर में हाई अलर्ट
अब दूर के नहीं रहे चंदा मामा : 54 साल बाद चांद पर इंसानी दस्तक और बचपन की वो मीठी यादें
तमिलनाडु का सियासी पारा हाई: क्या फिर से स्टालिन की होगी शानदार वापसी?
रामायण में श्रीराम बनने के लिए रणबीर कपूर ने अपनाई ये खास रणनीति
वृंदावन का चमत्कारी ताबीज: 10 साल बाद खुला तो अंदर से निकली ऐसी चीज कि उड़ गए होश
चांद अब दूर नहीं: नासा का आर्टेमिस II मिशन लॉन्च, 54 साल बाद इतिहास रचने निकले 4 अंतरिक्ष यात्री
हनुमान जयंती पर होगा रामायण का शंखनाद: रणबीर कपूर की फिल्म का टीजर आज होगा रिलीज
राहुल गांधी के साथ फोटो शेयर कर चर्चा में आए विजय गोयल, लोगों ने कहा- राजनीति में अभी उम्मीद बाकी है
महाकाल दर्शन के दौरान अक्षय कुमार से हुई धार्मिक चूक , नंदी के कान में मनोकामना कहते समय अनदेखी!
एनगिडी की जादुई गेंद पर गच्चा खा गए पूरन, उखड़े स्टंप्स और सन्न रह गया स्टेडियम