जनगणना-2027: अब घर बैठे दर्ज कराएं अपने मकान का ब्यौरा, पीएम और राष्ट्रपति ने की डिजिटल शुरुआत
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देश के सबसे विशाल प्रशासनिक और सांख्यिकीय अभियान जनगणना-2027 का औपचारिक आगाज हो गया है। यह पहली बार है जब भारत की जनगणना पूरी तरह से डिजिटल मोड में संचालित की जा रही है। इस अभियान के पहले चरण में मकानों की सूचीकरण एवं गणना (HLO) का कार्य शुरू किया गया है।

अति विशिष्ट लोगों ने की पहल इस ऐतिहासिक अभियान की शुरुआत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने स्वयं अपने घरों की जानकारी पोर्टल पर दर्ज कर की। इन नेताओं ने देशवासियों से इस डिजिटल प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की है।

क्या है स्व-गणना (Self-Enumeration)? भारत की जनगणना के इतिहास में पहली बार स्व-गणना की सुविधा दी गई है। इसके लिए सरकार ने se.census.gov.in पोर्टल लॉन्च किया है। यह सुविधा 16 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध है। नागरिक अपने मोबाइल नंबर और बुनियादी विवरण के जरिए लॉगिन कर अपने परिवार और मकान से जुड़ी जानकारी खुद भर सकते हैं।

कैसे मिलेगी यूनिक आईडी? फॉर्म सफलतापूर्वक भरते ही नागरिक को एक यूनिक सेल्फ-एन्यूमरेशन आईडी (SE ID) मिलेगी। जब सरकारी प्रगणक (enumerator) आपके घर सत्यापन के लिए आएंगे, तो आपको बस यही आईडी उन्हें देनी होगी।

पहले चरण में किन राज्यों में शुरुआत? जनगणना-2027 का पहला चरण फिलहाल 8 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू हुआ है। इनमें अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, गोवा, कर्नाटक, लक्षद्वीप, मिजोरम, ओडिशा, सिक्किम तथा दिल्ली के एनडीएमसी और दिल्ली छावनी क्षेत्र शामिल हैं। पहले ही दिन करीब 55,000 परिवारों ने डिजिटल पोर्टल का उपयोग किया।

6 महीने का महा-अभियान जनगणना का यह पहला चरण 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2026 तक यानी कुल 6 महीने चलेगा। हर राज्य को अपने क्षेत्र में सर्वेक्षण पूरा करने के लिए 30 दिन का समय दिया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत एकत्रित सभी आंकड़े पूरी तरह गोपनीय रहेंगे। डिजिटल सुरक्षा के लिए उन्नत एन्क्रिप्शन और मल्टी-लेयर ऑथेंटिकेशन का उपयोग किया गया है।

क्यों जरूरी है यह जनगणना? यह जनगणना केवल आंकड़ों का संकलन नहीं, बल्कि भविष्य की विकास योजनाओं का आधार है। इसमें मकानों की स्थिति, घरेलू सुविधाओं और उपलब्ध संसाधनों से जुड़े 33 प्रश्न शामिल हैं। इन आंकड़ों के आधार पर ही भविष्य में सरकारी नीतियों और जनकल्याणकारी योजनाओं का ढांचा तैयार किया जाएगा।

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