युद्ध संकट: भारत की एनर्जी कूटनीति का बड़ा दांव, 41 देशों से तेल मंगाकर खत्म की निर्भरता
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नई दिल्ली: वैश्विक स्तर पर बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों और विशेष रूप से अमेरिका-ईरान तनाव को देखते हुए भारत ने पहले ही अपनी कमर कस ली थी। भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को सुरक्षित करने के लिए दशकों पुरानी निर्भरता को तोड़ते हुए क्रूड ऑयल और गैस का आयात 27 देशों से बढ़ाकर 41 देशों तक पहुंचा दिया है।

संकट से पहले ही बदली रणनीति भारत अपनी जरूरत का लगभग 90 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है। किसी एक क्षेत्र या देश पर निर्भरता कम करने के लिए भारत ने रणनीतिक रूप से अपने एनर्जी बास्केट का विस्तार किया है। केवल खाड़ी देशों या बड़े उत्पादकों पर भरोसा करने के बजाय, अब भारत छोटे-छोटे ऊर्जा संपन्न देशों से भी सीधे समझौते कर रहा है।

PM मोदी के दौरों का एनर्जी कनेक्शन पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभिन्न देशों की जो यात्राएं की हैं, उनके पीछे एक गहरा रणनीतिक उद्देश्य रहा है। 2014 से 2025 के बीच पीएम मोदी ने ब्राजील, गुयाना, अर्जेंटीना जैसे दक्षिण अमेरिकी देशों और नाइजीरिया, मोजांबिक, घाना जैसे अफ्रीकी देशों का दौरा किया। ये यात्राएं आज भारत की तेल-गैस आपूर्ति की लाइफलाइन बन गई हैं।

रूस और सऊदी अरब बने सबसे बड़े स्तंभ वर्तमान में रूस भारत के लिए कच्चे तेल का सबसे बड़ा स्रोत बनकर उभरा है। फरवरी 2026 के आंकड़ों के अनुसार, भारत रूस से प्रतिदिन 10 लाख बैरल से अधिक कच्चा तेल आयात कर रहा है। वहीं, सऊदी अरब 10 लाख बैरल प्रतिदिन के साथ दूसरे स्थान पर है। इराक और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भी भारत की रिफाइनरियों की जरूरतों को पूरा करने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।

छोटे देशों से मिल रही एनर्जी सुरक्षा भारत की रणनीति अब बड़े उत्पादकों से आगे निकल गई है। नाइजीरिया और अंगोला जैसे अफ्रीकी देशों से भारत हाई-क्वालिटी ट्रांसपोर्ट फ्यूल (डीजल और एटीएफ) के लिए कच्चा तेल मंगा रहा है। वहीं, मैक्सिको से मिलने वाला माया ग्रेड तेल भारी ईंधन के उत्पादन में काम आता है। अमेरिका और नॉर्वे जैसे देशों से भी एलपीजी और एलएनजी की आपूर्ति बढ़ाकर भारत ने खाड़ी देशों पर दबाव कम किया है।

घरेलू उत्पादन पर भी जोर आयात में विविधता के साथ-साथ भारत ने अपनी जमीन पर भी उत्पादन तेज किया है। वर्तमान में भारत अपनी कुल जरूरतों का 12-15 फीसदी कच्चा तेल और करीब 50 फीसदी नेचुरल गैस का उत्पादन घरेलू स्तर पर ही कर रहा है। यह बहुआयामी दृष्टिकोण आने वाले किसी भी वैश्विक ऊर्जा संकट के समय भारत को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त है।

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