1984 दंगों के न्याय योद्धा एचएस फुल्का का घर वापसी जैसा फैसला, थाम लिया भाजपा का हाथ
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वरिष्ठ अधिवक्ता और 1984 सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों की आवाज बने एचएस फुल्का ने राजनीति में एक बड़ा कदम उठाया है। फुल्का अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए हैं। इस फैसले के साथ ही उन्होंने अपनी पुरानी राजनीतिक जड़ों की ओर रुख किया है।

पुराने साथियों का मिला साथ भाजपा में शामिल होने के बाद एचएस फुल्का ने कहा कि पिछले 40 वर्षों से वे दंगों के पीड़ितों को न्याय दिलाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। इस लंबी कानूनी यात्रा में उन्हें मदन लाल खुराना, अरुण जेटली और सुषमा स्वराज जैसे भाजपा के दिग्गज नेताओं का निरंतर समर्थन मिला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे लंबे समय से पार्टी के कानूनी कार्यों से जुड़े रहे हैं।

आप से पुरानी है भाजपा से नजदीकी फुल्का ने बताया कि 2014 से 2017 तक वे आम आदमी पार्टी (आप) के साथ भी रहे, लेकिन उनके वैचारिक और कार्य करने के तरीके भाजपा के साथ अधिक मेल खाते हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा के साथ उनका जुड़ाव राजनीतिक से ज्यादा भावनात्मक और पुराना है, जिसके चलते उन्होंने फिर से इस पार्टी को चुना है।

पंजाब की बदहाली पर जताई चिंता राजनीति में वापसी के कारणों पर चर्चा करते हुए फुल्का ने पंजाब की गिरती कानून व्यवस्था पर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा कि राज्य में जबरन वसूली (एक्सटॉर्शन) के कॉल अब आम बात हो गई है। राज्य सरकार इन गंभीर समस्याओं के प्रति उदासीन बनी हुई है और जनता की परेशानियों को नजरअंदाज कर रही है।

नशा और बंजर होती जमीन का खतरा फुल्का ने पंजाब के भविष्य को लेकर एक चेतावनी भी दी है। उनका कहना है कि राज्य में नशाखोरी और कानून व्यवस्था की विफलता के कारण स्थिति भयावह हो गई है। उन्होंने आगाह किया कि यदि यही हालत बनी रही, तो अगले 13-14 वर्षों में पंजाब की उपजाऊ जमीन बंजर हो सकती है।

पंजाब के लिए सक्रिय राजनीति एचएस फुल्का का मानना है कि पंजाब के मुद्दों को हल करने के लिए भाजपा ही एकमात्र ऐसा मंच है जहां वे प्रभावी ढंग से काम कर सकते हैं। उन्होंने राज्य सरकार की विफलता को अपने इस राजनीतिक कदम का मुख्य कारण बताया है ताकि वे पंजाब के हितों के लिए फिर से पूरी सक्रियता के साथ मैदान में उतर सकें।

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