आसमान छूते तेल के दाम: युद्ध की आग में झुलस रही ग्लोबल इकोनॉमी, जानिए कहां कितनी बढ़ी कीमतें
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ईरान-अमेरिका के बीच जारी युद्ध को एक महीने से ज्यादा का समय हो चुका है। इस भू-राजनीतिक तनाव का असर अब केवल युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार को अपनी चपेट में ले चुका है। दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बेतहाशा बढ़ गई हैं, जिससे कई देशों की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है।

क्रूड ऑयल ने तोड़े रिकॉर्ड ग्लोबल फ्यूल मार्केट में मची उथल-पुथल के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 116 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। कच्चे तेल की यह रिकॉर्ड बढ़त सीधे तौर पर पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में तब्दील हो रही है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, सप्लाई चेन में आई बाधाओं ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।

डीजल की कीमतों में महा-महंगाई आईबीसी ग्रुप के सीईओ मारियो नफल द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, विभिन्न देशों में डीजल की कीमतों में भारी उछाल आया है। फिलीपींस में डीजल की कीमतें 81.6% तक बढ़ गई हैं, जो दुनिया में सबसे ज्यादा है। इसके अलावा नाइजीरिया में 78.3%, मलेशिया में 57.9%, अमेरिका में 41.2% और जर्मनी में 30.9% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

इन देशों में मची हाहाकार विकासशील देशों के लिए यह संकट जानलेवा साबित हो रहा है। श्रीलंका, पाकिस्तान और वियतनाम जैसे देशों में तेल की भारी किल्लत देखी जा रही है। ईंधन की बढ़ती कीमतों ने इन देशों में ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ा है और महंगाई आसमान छू रही है।

क्यों बनी यह खतरनाक स्थिति? ईरान ने युद्ध की शुरुआत के साथ ही हार्मुरज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे प्रमुख व्यापारिक मार्गों पर अपना दबाव बना लिया है। तेल टैंकरों पर हमलों के डर से ग्लोबल सप्लाई चेन बाधित हो गई है। ईरान की इस रणनीति ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को बैकफुट पर ला दिया है, जिसका नतीजा वैश्विक स्तर पर तेल की किल्लत और बढ़ती कीमतों के रूप में सामने आया है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर खतरा यह संकट केवल ऊर्जा तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे वैश्विक मुद्रास्फीति (Inflation) भी बढ़ रही है। यदि युद्ध लंबा खिंचता है, तो इसके परिणाम और भी विनाशकारी हो सकते हैं। परिवहन महंगा होने से खाद्य पदार्थों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भी तेजी आने की आशंका है, जिससे दुनिया भर के उपभोक्ता सीधे प्रभावित हो रहे हैं।

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