असम में UCC की तैयारी: चार शादियों पर लगेगी रोक, अमित शाह का बड़ा चुनावी शंखनाद
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असम में विधानसभा चुनावों की सरगर्मियों के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक बड़ा ऐलान किया है। नलबाड़ी में एक जनसभा को संबोधित करते हुए शाह ने साफ कर दिया है कि भाजपा राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) लाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

चार शादियों पर लगेगा बैन अमित शाह ने मंच से घोषणा की कि राज्य में UCC लागू होने के बाद बहुविवाह की प्रथा पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया जाएगा। यानी अब असम में चार शादियां करना कानूनी रूप से मान्य नहीं होगा। यह कदम राज्य के डेमोग्राफिक बदलावों को नियंत्रित करने की भाजपा की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

घुसपैठियों पर कड़ा प्रहार गृह मंत्री ने अवैध घुसपैठ को राज्य की सबसे बड़ी समस्या करार दिया। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वोट-बैंक की लालच में पिछली सरकारों ने दशकों तक राज्य के डेमोग्राफिक्स को बदलने की साजिश रची।

शाह ने वादा किया, अगर असम में तीसरी बार भाजपा की सरकार बनती है, तो अगले पांच सालों में हम हर एक घुसपैठिए की पहचान करेंगे, उन्हें वोटर लिस्ट से बाहर करेंगे और उन्हें वापस उनके मूल देश भेज देंगे।

ज़मीन कब्ज़ा मुक्त कराने का दावा अमित शाह ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार ने बॉर्डर को पूरी तरह सील कर दिया है। उन्होंने बताया कि घुसपैठियों के कब्जे से 1.25 लाख एकड़ सरकारी ज़मीन को वापस लिया गया है। शाह ने दोटूक कहा, यह मिट्टी और संस्कृति हमारी है, इस पर किसी घुसपैठिए का कोई अधिकार नहीं है।

शांति और स्थिरता का मुद्दा अशांति के दौर को याद करते हुए शाह ने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में असम बम धमाकों और हिंसा से जूझ रहा था। वहीं, पिछले 10 वर्षों में भाजपा सरकार ने बोडो, कार्बी, DNLA और ULFA के साथ ऐतिहासिक समझौते किए हैं। उन्होंने दावा किया कि आज 10,000 से अधिक लोगों ने हथियार छोड़कर मुख्यधारा में वापसी की है।

चुनावी मुकाबला असम की 126 विधानसभा सीटों के लिए 9 अप्रैल को मतदान होना है, जबकि नतीजे 4 मई को आएंगे। एक तरफ मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में भाजपा लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस अपनी खोई हुई ज़मीन हासिल करने के लिए संघर्ष कर रही है। अमित शाह का यह बयान चुनाव से ठीक पहले ध्रुवीकरण की नई बहस छेड़ सकता है।

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