अमेरिका इस समय अपने आधुनिक इतिहास के सबसे बड़े नागरिक असंतोष की आग में झुलस रहा है। देश के प्रमुख शहरों—वाशिंगटन डीसी, न्यूयॉर्क, लॉस एंजिल्स और शिकागो—में नो किंग्स आंदोलन के तहत लाखों लोग सड़कों पर उतर आए हैं। यह विरोध प्रदर्शन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की विवादास्पद नीतियों, आर्थिक बदहाली और ईरान के साथ छिड़े युद्ध में अमेरिकी भागीदारी के खिलाफ है।
नो किंग्स आंदोलन का नाम प्रतीकात्मक रूप से राष्ट्रपति की बढ़ती शक्तियों के विरोध में रखा गया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि ट्रंप प्रशासन कूटनीति को दरकिनार कर सैन्य बल का उपयोग कर रहा है, जो अमेरिकी लोकतंत्र की मर्यादाओं के विपरीत है। व्हाइट हाउस के बाहर जमा भीड़ तानाशाही नहीं चलेगी के नारे लगा रही है। इस आंदोलन में युवाओं से लेकर सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी तक शामिल हैं, जो तत्काल युद्ध विराम की मांग कर रहे हैं।
जनविद्रोह का मुख्य कारण ईरान के खिलाफ अमेरिका का बढ़ता सैन्य दखल है। हाल ही में मिडिल ईस्ट में 3,500 अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती और यूएसएस त्रिपोली को युद्ध क्षेत्र में भेजने के फैसले ने जनता के गुस्से को और भड़का दिया है। अमेरिकी परिवारों में डर का माहौल है, क्योंकि ईरान की धमकियां लगातार बढ़ रही हैं। लोग वियतनाम युद्ध जैसी स्थिति की आशंका से डरे हुए हैं और अपने बच्चों को युद्ध की आग में झोंकने के खिलाफ मजबूती से खड़े हैं।
युद्ध की मार सीधे आम आदमी की जेब पर पड़ रही है। वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित होने से अमेरिका में गैस और पेट्रोल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। आसमान छूती महंगाई ने आम नागरिकों की कमर तोड़ दी है। प्रदर्शनकारियों का सीधा सवाल है: जब देश की अर्थव्यवस्था संकट में है, तो अरबों डॉलर युद्ध पर क्यों बर्बाद किए जा रहे हैं? कई शहरों में प्रदर्शनों के दौरान हिंसक झड़पें भी देखी गई हैं, जहां पुलिस को आंसू गैस का सहारा लेना पड़ा है।
इतने बड़े पैमाने पर हो रहे विरोध के बावजूद राष्ट्रपति ट्रंप अपने रुख पर कायम हैं। व्हाइट हाउस ने इन प्रदर्शनों को राष्ट्रविरोधी करार दिया है, जबकि ट्रंप का तर्क है कि ईरान को रोकना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। देश के अंदर गृह युद्ध जैसे हालात को देखते हुए नेशनल गार्ड्स को अलर्ट पर रखा गया है। यह आंदोलन अब केवल एक राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि ट्रंप प्रशासन के भविष्य के लिए एक बड़ी परीक्षा बन चुका है।
Hundreds of thousands of people have taken part in more than 3000 rallies across the U.S. protesting against Donald Trump s policies.
— Sky News (@SkyNews) March 28, 2026
Organisers hope the No Kings rallies will amount to be the largest single-day protest in US history.https://t.co/5bQ3gq3Ke1
📺 Sky 501 pic.twitter.com/rll2KfIffk
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