सर, ये मीम्स बंद नहीं होने चाहिए : राघव चड्ढा ने खुद पर बने मीम्स का लिया मजा, सोशल मीडिया पर छिड़ी जोक्स की जंग
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आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा इन दिनों अपनी संसदीय सक्रियता के साथ-साथ सोशल मीडिया पर अपनी मीम-फ्रेंडली छवि को लेकर भी सुर्खियों में हैं। युवाओं के बीच लोकप्रिय हो रहे चड्ढा को खुद पर बन रहे मजेदार मीम्स से कोई गुरेज नहीं है, बल्कि वे इनका भरपूर आनंद ले रहे हैं।

खुद बनाया अपना मीम शुक्रवार को राघव चड्ढा ने राज्यसभा में अपनी एक तस्वीर साझा करते हुए एक्स (ट्विटर) पर लिखा, मीम्स बहुत पसंद आ रहे हैं, आप लोग सच में बहुत क्रिएटिव हो... इन्हें भेजते रहो। उन्होंने अपने ही पोस्ट में मजाकिया लहजे में कैप्शन दिया, सर, ये मीम्स बंद नहीं होने चाहिए। इस पोस्ट के साथ उन्होंने यह जता दिया कि वे खुद की खिंचाई को भी सकारात्मक तरीके से लेते हैं।

इंटरनेट पर जोक्स की बाढ़ चड्ढा की इस अपील के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने अपनी रचनात्मकता की हदें पार कर दीं। किसी ने उन्हें मीम्स मिनिस्टर की उपाधि दी, तो किसी ने उनसे अजीबोगरीब सामाजिक मुद्दों को उठाने की गुहार लगाई।

एक यूजर ने मीम बनाकर दिखाया कि चड्ढा संसद में मांग कर रहे हैं, सर, जब पैसे नारियल पानी के हैं, तो हम पूरे नारियल के पैसे क्यों दें? एक अन्य क्रिएटिव मीम में उन्होंने हफ्ते में चार रविवार की मांग करते हुए दिखाया गया। वहीं, कुछ यूजर्स ने बॉलीवुड की गोलमाल और हेरा फेरी जैसी कॉमेडी फिल्मों की वापसी की मांग को भी उनके जरिए संसद में उठाया।

क्यों मशहूर हैं चड्ढा के मुद्दे? राघव चड्ढा की लोकप्रियता का मुख्य कारण उनके द्वारा उठाए गए वे मुद्दे हैं जो सीधे आम आदमी की जेब और जीवन से जुड़े हैं। वे लगातार 28 दिन के मोबाइल रिचार्ज, रात 12 बजे डेटा खत्म होने, ट्रैफिक जाम की समस्या और पैकेटबंद खाने के नाम पर मिलने वाले शुगर सिरप जैसे विषयों पर सरकार और कंपनियों को घेर रहे हैं।

संसद में आम जनता की आवाज हाल ही में उन्होंने प्रीपेड मोबाइल ग्राहकों की चिंता जताते हुए कहा था कि रिचार्ज खत्म होने पर इनकमिंग सेवाएं बंद करना पूरी तरह गलत है। साथ ही, उन्होंने डेटा रोलओवर की सुविधा की वकालत भी की। ट्रैफिक जाम पर उन्होंने कहा कि शहरों को विशाल पार्किंग लॉट में तब्दील कर दिया गया है।

पैकेटबंद जूस और खाद्य पदार्थों की मार्केटिंग के खिलाफ भी उन्होंने मोर्चा खोला है, जहां वे दिखा रहे हैं कि कैसे कंपनियां विज्ञापनों में फलों की तस्वीरें लगाकर ग्राहकों को गुमराह कर रही हैं। भले ही सोशल मीडिया पर इन पर मीम्स बन रहे हों, लेकिन चड्ढा की यह मीम-पॉलिटिक्स उन्हें जनता के बीच और अधिक स्वीकार्य बना रही है।

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