अब बिना आधार तत्काल टिकट नहीं: रेलवे ने बदला बुकिंग का पूरा गेम
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भारतीय रेलवे ने यात्रियों को राहत देते हुए अपनी टिकटिंग प्रणाली में बड़ा बदलाव किया है। अब दलालों और फर्जी आईडी पर नकेल कसने के लिए रेलवे ने आधार वेरिफिकेशन को अनिवार्य बना दिया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में इसकी जानकारी दी।

1 जुलाई 2025 से बदलेंगे नियम रेल मंत्री के अनुसार, 1 जुलाई 2025 से तत्काल टिकट बुकिंग के लिए आधार कार्ड से लिंक अकाउंट होना जरूरी होगा। इसके साथ ही, सामान्य रिजर्वेशन खुलने के पहले दिन होने वाली बुकिंग के लिए भी आधार वेरिफिकेशन को अनिवार्य कर दिया गया है।

फर्जी आईडी पर सख्त कार्रवाई रेलवे ने सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए अब तक 3.04 करोड़ फर्जी यूजर आईडी को स्थायी रूप से बंद कर दिया है। इसके अलावा, 2.94 करोड़ संदिग्ध अकाउंट्स को री-वेरिफिकेशन के लिए सस्पेंड किया गया है। रेल मंत्री ने स्पष्ट किया कि आधार लिंक न होने पर किसी का अकाउंट बंद नहीं किया गया, बल्कि केवल अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है।

88% यात्री अब ऑनलाइन आंकड़ों पर गौर करें तो अब यात्री स्टेशनों की लंबी लाइनों के बजाय मोबाइल और लैपटॉप को तरजीह दे रहे हैं। फिलहाल लगभग 88% रिजर्व टिकट ऑनलाइन बुक किए जा रहे हैं। फरवरी 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, 48.25 करोड़ टिकट ऑनलाइन बुक हुए, जबकि काउंटर से केवल 6.15 करोड़ बुकिंग की गई।

तकनीक से दलालों की छुट्टी रेलवे ने एंटी-बॉट तकनीक का सहारा लिया है, जिससे लगभग 64% संदिग्ध ट्रैफिक को रोका गया है। दलालों द्वारा सक्रिय 13,023 संदिग्ध ईमेल डोमेन को ब्लॉक कर दिया गया है। साथ ही, 4.07 लाख संदिग्ध पीएनआर (PNR) की पहचान की गई है, जिनमें से 408 मामलों में साइबर क्राइम सेल को शिकायत भेजी गई है।

टिकटों की उपलब्धता बढ़ेगी इन कड़े नियमों का सीधा मकसद वास्तविक यात्रियों को प्राथमिकता देना है। रेल मंत्री का मानना है कि आधार वेरिफिकेशन और तकनीकी सुधारों के कारण एक व्यक्ति या एजेंट के लिए कई फर्जी अकाउंट बनाना अब लगभग असंभव हो गया है। इससे पीक सीजन और तत्काल कोटे में आम यात्रियों को कन्फर्म टिकट मिलने की संभावना काफी बढ़ गई है।

रिफंड और शुल्क में कोई बदलाव नहीं रेल मंत्री ने स्पष्ट किया है कि रिफंड नियमों या क्लर्केज चार्ज में कोई बदलाव नहीं किया गया है। वेटिंग टिकट कैंसिल करने पर लगने वाला चार्ज 2015 के मौजूदा नियमों के अनुसार ही लागू रहेगा। IRCTC की वेबसाइट के रखरखाव के लिए लिया जाने वाला छोटा सा कन्वीनियंस शुल्क भी यथावत रहेगा।

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