क्या पाकिस्तान के दबाव में झुका ईरान? शुक्रिया भारत-कश्मीर वाले पोस्ट डिलीट कर मचा सियासी बवाल
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एक मानवीय संवेदना से शुरू हुआ मामला अब एक गहरे डिप्लोमैटिक विवाद में तब्दील हो गया है। भारत में ईरानी दूतावास द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए वे पोस्ट डिलीट कर दिए गए हैं, जिनमें उन्होंने मानवीय सहायता के लिए भारत और खासतौर पर कश्मीर के लोगों का आभार जताया था।

क्या था मामला? ईरानी एम्बेसी ने हाल ही में कुछ भावुक पोस्ट किए थे। इसमें उन्होंने कश्मीर के लोगों की दरियादिली की तारीफ की थी। एक पोस्ट में एक कश्मीरी विधवा द्वारा अपने पति की निशानी के तौर पर रखा गया सोना ईरान को दान करने का जिक्र था। इन पोस्ट्स के अंत में स्पष्ट रूप से शुक्रिया भारत और शुक्रिया कश्मीर लिखा गया था।

पाकिस्तान का दबाव और तेहरान का बैकफुट जैसे ही ये पोस्ट सामने आए, पाकिस्तानी सोशल मीडिया यूजर्स ने कमेंट्स और विरोध की झड़ी लगा दी। उनका मुख्य ऐतराज इस बात पर था कि ईरान ने कश्मीर को भारत का हिस्सा बताया। पाकिस्तान के भारी दबाव के आगे ईरानी एम्बेसी ने घुटने टेक दिए और बिना कोई स्पष्टीकरण दिए वे सभी पोस्ट डिलीट कर दिए।

बाद में एक वीडियो फिर से अपलोड किया गया, लेकिन उसमें से भारत और कश्मीर का जिक्र पूरी तरह गायब था। अब वहां सिर्फ हम आपकी मेहरबानी कभी नहीं भूलेंगे जैसा सामान्य संदेश रह गया है।

इंसानी जज्बात पर हावी हुई राजनीति इस घटना ने उन लोगों को आहत किया है जिन्होंने दिल खोलकर ईरान की मदद की थी। जम्मू-कश्मीर के आम लोगों ने अपने गहने, बचत और कीमती सामान युद्ध प्रभावित ईरान के लोगों के लिए दान किए थे। एक निजी मानवीय एकता को अब राजनीतिक मोलभाव का शिकार बना दिया गया है।

भारत में नाराजगी और कूटनीतिक सवाल भारतीय नागरिकों में इस रुख को लेकर भारी आक्रोश है। सोशल मीडिया पर यूजर्स इसे डिप्लोमैटिक अवसरवाद करार दे रहे हैं। लोगों का कहना है कि एक तरफ ईरान भारत से आर्थिक मदद और सहयोग की अपेक्षा रखता है, तो दूसरी तरफ पाकिस्तान के दबाव में भारत की संप्रभुता का अपमान करने से नहीं चूकता। विदेश मंत्रालय से इस पर कड़ा रुख अपनाने की मांग की जा रही है।

पुराना है विवादित बयानबाजी का इतिहास ईरान का यह दोहरा रवैया पहली बार सामने नहीं आया है। इससे पहले 2019 में अनुच्छेद 370 हटने पर और 2020 के दिल्ली दंगों के दौरान भी ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई ने भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी की थी, जिस पर भारत ने कड़ा एतराज जताया था।

इन सबके बीच, पाकिस्तान खुद को पश्चिम एशिया के तनाव में एक मध्यस्थ के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है। वह एक ओर सऊदी अरब के साथ अपनी प्रतिबद्धता दिखा रहा है, तो दूसरी ओर ईरान को भारत के खिलाफ मोहरे की तरह इस्तेमाल करने से भी नहीं चूक रहा। फिलहाल, ईरान की इस चुप्पी ने भारत-ईरान के बीच एक बार फिर अविश्वास की खाई पैदा कर दी है।

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