कोलंबिया में सैन्य विमान क्रैश: 121 सवार, 60 से ज्यादा मौतों से दहला देश, क्या इंजन फेलियर बना काल?
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कोलंबिया के प्यूर्टो लेगुइज़ामो इलाके में सोमवार को हुए एक दर्दनाक सैन्य विमान हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। वायुसेना का C-130 हरक्यूलिस विमान उड़ान भरने के कुछ ही मिनटों बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में अब तक 60 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है।

टेकऑफ के तुरंत बाद आसमान से जमीन पर आया विमान विमान ने प्यूर्टो लेगुइज़ामो से उड़ान भरी थी, लेकिन चंद मिनटों के भीतर ही वह हादसे का शिकार हो गया। एयरपोर्ट से महज 2 किलोमीटर दूर एक खेत में गिरे इस विमान से धुएं का गुबार आसमान में छा गया। विमान में कुल 121 लोग सवार थे, जिनमें ज्यादातर सैनिक थे। 70 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं।

स्थानीय लोगों ने दिखाया साहस दुर्घटना के तुरंत बाद अफरातफरी मच गई। स्थानीय निवासी मसीहा बनकर सामने आए और अपने निजी वाहनों व मोटरसाइकिलों से घायलों को अस्पताल पहुंचाया। इलाके के दो छोटे क्लीनिकों में प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर घायलों को बड़े शहरों में एयरलिफ्ट किया गया। सेना ने भी मोर्चा संभालते हुए रेस्क्यू ऑपरेशन तेज कर दिया।

तकनीकी खराबी या महज इत्तेफाक? कोलंबियाई वायुसेना के शुरुआती बयान के मुताबिक, हादसा तकनीकी खराबी के कारण हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि चार इंजन वाले C-130 विमान में टेकऑफ के तुरंत बाद सभी सिस्टम का फेल होना एक गंभीर संकेत है। क्या यह कोई बड़ा तकनीकी फेलियर था या इसमें मानवीय चूक हुई? इसकी जांच अभी जारी है।

हमले की आशंका खारिज हादसे के बाद तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं, लेकिन रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल ऐसे कोई सबूत नहीं मिले हैं जिनसे यह लगे कि विमान पर किसी विद्रोही गुट ने हमला किया था। आधिकारिक रूप से इसे अभी एक दुर्घटना ही माना जा रहा है।

विमान का इतिहास और मेंटेनेंस पर सवाल यह विमान अमेरिका द्वारा 2020 में कोलंबिया को दिया गया था और 2023 में ही इसका ओवरहॉल किया गया था। विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ विमान के पुराने होने को इसका कारण नहीं माना जा सकता। इंजन फेलियर से लेकर पायलट कंट्रोल सिस्टम तक, हर पहलू की बारीकी से जांच की जा रही है।

सियासी गलियारों में गरमाई बहस हादसे के बाद कोलंबिया में राजनीति भी तेज हो गई है। राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने सैन्य उपकरणों के आधुनिकीकरण पर जोर दिया है। वहीं, विपक्ष ने आरोप लगाया है कि रक्षा बजट में कटौती के कारण पायलट्स के प्रशिक्षण और विमानों के मेंटेनेंस पर बुरा असर पड़ा है। इस हादसे ने देश की रक्षा तैयारियों पर भी एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।

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