क्या ट्रंप ने ईरान के आगे घुटने टेक दिए? ऊर्जा हमलों पर 5 दिन का पॉज और पीछे छिपी कूटनीति
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अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर होने वाले हमलों को 5 दिनों के लिए टालने का आदेश दिया है। इस फैसले के बाद वैश्विक राजनीति में यह बहस छिड़ गई है कि क्या ट्रंप वास्तव में ईरान की धमकियों से दबाव में हैं?

ट्रंप का सकारात्मक संकेत या मजबूरी? सोमवार को ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर जानकारी दी कि अमेरिका और ईरान के बीच पिछले दो दिनों से गहन और रचनात्मक बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा कि इसी सार्थक बातचीत को देखते हुए उन्होंने पेंटागन को निर्देश दिया है कि ईरान के बिजली संयंत्रों और ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर किसी भी तरह का हमला फिलहाल रोका जाए।

ईरान का दावा: धमकी का असर ट्रंप के इस फैसले को ईरान ने अपनी जीत के रूप में पेश किया है। अफगानिस्तान स्थित ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया पर एक तीखी टिप्पणी करते हुए इसे ट्रंप का पीछे हटना बताया। ईरान का दावा है कि उसने अमेरिका को स्पष्ट चेतावनी दी थी कि यदि उसके ऊर्जा ठिकानों को छुआ गया, तो वह पूरे क्षेत्र के ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को मलबे में बदल देगा। ईरान का कहना है कि इसी कड़ी चेतावनी के बाद ट्रंप को अपना रुख नरम करना पड़ा।

क्या बातचीत के लिए कोई सामने है? अजीब विडंबना यह है कि ट्रंप बातचीत तो करना चाहते हैं, लेकिन उनका यह भी मानना है कि बातचीत के लिए ईरान में सही लोग उपलब्ध नहीं हैं। ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि संघर्ष के दौरान ईरान के कई वरिष्ठ नेताओं के मारे जाने के बाद, संवाद स्थापित करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। उन्होंने स्वीकार किया, हम बात करना चाहते हैं, लेकिन वहां बात करने वाला कोई नहीं बचा है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य का संकट तनाव के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ (Strait of Hormuz) का मुद्दा सबसे गंभीर बना हुआ है। यह मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति की जीवनरेखा है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान फिलहाल इस रणनीतिक मार्ग को दोबारा खोलने के मूड में नहीं है। यदि यह रास्ता बंद रहता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका असर विनाशकारी हो सकता है।

आगे क्या होगा? ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि हमलों पर यह रोक पूरी तरह से बातचीत की सफलता पर टिकी है। यदि 5 दिनों के भीतर कूटनीति विफल रहती है, तो क्या अमेरिका फिर से हमले करेगा या यह युद्धविराम की एक लंबी शुरुआत है? फिलहाल, दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या दोनों देश इस कूलिंग पीरियड का उपयोग समाधान निकालने के लिए करेंगे या यह महज एक बड़ी जंग की तैयारी के लिए छोटा सा ठहराव है।

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