भारतीय बंदीकूट का डंका: सिंगापुर में चीन-अमेरिका को पछाड़कर जीते करोड़ों के ऑर्डर
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भारतीय डीप-टेक स्टार्टअप जेनरोबोटिक्स (Genrobotics) ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी कामयाबी हासिल की है। कंपनी ने सिंगापुर की वॉटर अथॉरिटी के साथ 80 करोड़ रुपये का एक बड़ा कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है।

इस डील के तहत अगले दो सालों में सिंगापुर के सीवर नेटवर्क की सफाई और जांच के लिए 44 रोबोट्स तैनात किए जाएंगे। खास बात यह है कि इस प्रोजेक्ट के लिए दुनिया भर की 600 से ज्यादा कंपनियों ने दावेदारी पेश की थी, जिन्हें पछाड़कर भारतीय स्टार्टअप ने यह बाजी मारी।

आनंद महिंद्रा का बड़ा दांव और गर्व

इस सफलता पर उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने भी खुशी जताई है। उन्होंने 2020 में इस स्टार्टअप में निवेश किया था। महिंद्रा का कहना है कि उनका निवेश सिर्फ मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि कंपनी के मिशन से प्रेरित था।

महिंद्रा ने कहा कि जेनरोबोटिक्स ने यह साबित कर दिया है कि अगर नेक इरादा हो, तो सामाजिक बदलाव और मुनाफा दोनों साथ-साथ चल सकते हैं। उन्होंने इस स्टार्टअप को पर्पस-लेड कंपनी (उद्देश्य-संचालित) करार दिया है।

मैनुअल स्कैवेंजिंग के खिलाफ जंग

जेनरोबोटिक्स के बंदीकूट (Bandicoot) रोबोट को बनाने के पीछे का मुख्य उद्देश्य भारत में मैनुअल स्कैवेंजिंग जैसी अमानवीय प्रथा को खत्म करना था। यह प्रथा न केवल मानवीय गरिमा के खिलाफ है, बल्कि सीवर की सफाई करने वाले लोगों की जान के लिए भी बड़ा खतरा है।

कंपनी ने अपनी तकनीक से इस खतरनाक काम को अब मशीनों के हवाले कर दिया है, जिससे न केवल सफाई बेहतर हुई है, बल्कि इंसानी जानों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हुई है।

भारत में भी बढ़ रही डिमांड

सिंगापुर में मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान के बाद, जेनरोबोटिक्स को घरेलू स्तर पर भी बड़ी सफलता मिल रही है। हाल ही में कंपनी ने अहमदाबाद म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन के साथ 17 करोड़ रुपये का टेंडर हासिल किया है।

इस प्रोजेक्ट के तहत बंदीकूट मोबिलिटी+ रोबोट्स को तैनात किया जाएगा। यह कदम अहमदाबाद के सीवर प्रबंधन को अधिक सुरक्षित और आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव साबित होगा।

भविष्य के लिए सबक

जेनरोबोटिक्स की यह सफलता उन स्टार्टअप्स के लिए एक उदाहरण है जो तकनीक के जरिए समाज में सुधार लाना चाहते हैं। आनंद महिंद्रा ने इसे अपने मंडे मोटिवेशन के तौर पर शेयर किया है।

यह साबित होता है कि जब टेक्नोलॉजी मानव कल्याण के साथ जुड़ती है, तो वह केवल स्थानीय नहीं, बल्कि ग्लोबल स्तर पर भी अपनी धाक जमा सकती है। ऐसे स्टार्टअप्स ही भविष्य की नींव रख रहे हैं, जहां तकनीक और इंसानियत साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलते हैं।

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