ईरान-इजरायल युद्ध का साया: भारत का एक्शन प्लान तैयार, मोदी सरकार ने बनाया 11 सेक्टरों को सुरक्षित रखने का ब्लूप्रिंट
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मिडिल ईस्ट में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध की आहट के बीच भारत सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार रात दिल्ली में सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) की एक हाई-लेवल बैठक बुकी, जिसमें देश की अर्थव्यवस्था और आम जनता को सुरक्षित रखने के लिए एक ठोस रणनीति तैयार की गई है।

तेल और गैस की आपूर्ति पर सरकार की पैनी नजर भारत अपनी जरूरत का 85% कच्चा तेल, 50% नेचुरल गैस और 60% एलपीजी आयात करता है। युद्ध की वजह से सप्लाई चेन पर गहरा असर पड़ा है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी स्थिति में पेट्रोल, डीजल और गैस की किल्लत नहीं होने दी जाएगी। आपूर्ति को सुचारू रखने के लिए कूटनीतिक स्तर पर वैकल्पिक देशों और रास्तों की तलाश तेज कर दी गई है।

11 संवेदनशील सेक्टरों की सुरक्षा का रोडमैप सरकार ने युद्ध के संभावित असर को देखते हुए देश के 11 महत्वपूर्ण क्षेत्रों की पहचान की है, जिनमें कृषि, उर्वरक, खाद्य सुरक्षा, पेट्रोलियम, बिजली, एमएसएमई, निर्यात, शिपिंग, व्यापार, वित्त और आपूर्ति श्रृंखला शामिल हैं। इन क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए सरकार तीन चरणों (अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक) में काम कर रही है।

खाद और अनाज: किसानों को मिलेगी निर्बाध सेवा आगामी खरीफ सीजन को देखते हुए सरकार ने उर्वरक (Fertilizer) की उपलब्धता पर विशेष जोर दिया है। पिछले वर्षों में बनाए गए बफर स्टॉक की बदौलत किसानों को खाद की कमी नहीं होने दी जाएगी। यदि पश्चिम एशिया से सप्लाई में बाधा आती है, तो सरकार ने खाद के अन्य वैकल्पिक स्रोतों से आयात की पूरी व्यवस्था तैयार कर ली है। इससे देश की खाद्य सुरक्षा पूरी तरह सुरक्षित है।

बिजली संकट की कोई संभावना नहीं आम जनता को राहत देते हुए सरकार ने साफ किया है कि देश के बिजली संयंत्रों में कोयले का पर्याप्त भंडार मौजूद है। इसलिए, अंतरराष्ट्रीय संघर्ष का असर बिजली की आपूर्ति पर नहीं पड़ेगा। पैनिक में आकर सामान जमा करने की जरूरत नहीं है, सरकार बाजार में कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए पूरी तरह सक्रिय है।

भारत की थ्री-प्रोंग्ड रणनीति संकट से निपटने के लिए सरकार ने तीन स्तरों पर काम शुरू कर दिया है:

  1. अल्पकालिक (Short-term): तत्काल आपूर्ति सुनिश्चित करना और कीमतों पर लगाम लगाना।
  2. मध्यम अवधि (Medium-term): तेल और खाद के लिए वैकल्पिक आयात मार्गों को विकसित करना और बफर स्टॉक बढ़ाना।
  3. दीर्घकालिक (Long-term): ऊर्जा सुरक्षा के लिए रिन्यूएबल एनर्जी (अक्षय ऊर्जा) पर जोर देना और घरेलू उत्पादन क्षमता (MSMEs) को बढ़ाकर आत्मनिर्भरता हासिल करना।

मोदी सरकार का यह एक्शन प्लान स्पष्ट करता है कि भारत वैश्विक अस्थिरता के बीच अपनी अर्थव्यवस्था और जन-जीवन को बचाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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